कहीं आपकी कुंडली में भी तो ये नहीं है दोष, आने वाली है तबाही   

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नई दिल्ली:अक्सर जब लोगों के काम में कोई बाधा आती है, तो सभी लोग यही कहते हैं हमारी किस्मत खराब है। कभी-कभी लोग ये भी कहते हैं कुंडली में दोष है।वास्तुशास्त्र के अनुसार सभी व्यक्ति के कुंडली में दोष होता है। कुंडली में दोष होने पर लोगों को कई तरह की परेशानियां होती है। चलिए आज हम आपको बताएंगे कुंडली में क्या दोष होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं।

काम में कोई बाधा

शनि दोष

कुंडली में शनि दोष होना बहुत अशुभ माना जाता है। जब किसी की कुंडली में शनि दोष होता है तो व्यक्ति को समाज में अपमानित होना पड़ता है। लोगों को नौकरी में और व्यापार में काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

मांगलिक दोष

जब कुंडली में लग्न भाव, चौथे भाव,सातवें भाव, आठवें और दसवें भाव में मंगल स्थित होता है तब कुंडली में मंगल दोष होता है। जिसकी कुंडली में मंगल दोष होता है उस व्यक्ति को विवाह संबंधी परेशानियां, रक्त संबंधी बीमारियों और भूमि-भवन संबंधी समस्याएं होती रहती  हैं।

 

कालसर्प दोष

हमेशा राहु-केतु की वजह से ही कालसर्प दोष बनता है। कुंडली में कालसर्प दोष बनने पर जातक को संतान और धन संबंधी परेशानियां आने लगती है और जीवन में उतार-चढ़ाव आता है।

प्रेत दोष

जब कुंडली के प्रथम भाव में चन्द्र के साथ राहु की युति होने पर एवं पंचम और नवम भाव में कोई कठोर ग्रह स्थित हो तो उस जातक पर भूत-प्रेत, पिशाच या बुरी आत्माओं का प्रभाव रहता है।

काम में कोई बाधा

पितृदोष

कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में से दो कोई एक ही घर में स्थित होते हैं। पितृदोष होने पर संतान संबंधी तमाम तरह की परेशानी आती है। मान्यता के अनुसार पितरों का दाह-संस्कार सही ढंग से ना होने पर पितृ नाराज रहते हैं जिसके कारण जातक को परेशानी झेलनी पड़ती है।

काम में कोई बाधा

चाण्डाल दोष

जातक की कुंडली में गुरु-राहू की युति होने पर चाण्डाल दोष का निर्णाण होता है। यह दोष होने पर व्यक्ति बुरी संगत का शिकार होने लगता है।

ग्रहण दोष

यह दोष तब बनता है जब सूर्य या चन्द्रमा की युति राहु या केतु से होता है। ग्रहण दोष होने पर व्यक्ति के मन में हमेशा डर बना रहता है। इस दोष से ग्रसित व्यक्ति हमेशा अपने काम को अधूरा छोड़ देता है फिर नए काम के बारे में सोचने लगता है।

काम में कोई बाधा

केमद्रुम दोष

यह दोष चंद्रमा से संबंध रखता है। चंद्रमा आपकी कुंडली के जिस घर में हो, तो उसके आगे और पीछे के घर में कोई ग्रह न हो तो कुंडली में केमद्रुम दोष बनता है। इस दोष के होने पर व्यक्ति गरीब भी हो सकता है।

अमावस्या दोष

ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को कुंडली बनाते समय बहुत ध्यान दिया जाता है।चन्द्रमा को मन का कारक माना जाता है। सूर्य और चन्द्रमा जब दोनों एक ही घर मे होते है, तो अमावस्या दोष बनता है। कुंडली में यह दोष बनने पर उस जातक की कुंडली में चन्द्रमा क्षीण और प्रभावहीन हो जाता है। इस दोष के होने पर व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

काम में कोई बाधा

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