J&K सरकार की अनूठी स्कीम- आतंकी करे सरेंडर तो मिलेगा रोजगार, परिवार को इनाम

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जम्मू। कश्मीरी युवाओं को आतंकी बनने से रोकने की कोशिशों के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार मार्च में नई सरेंडर और रिहैबिलिटेशन स्कीम लाने जा रही है। जम्मू-कश्मीर में 14 सालों में ऐसा पहली बार होगा, जब राज्य में इस तरह की स्कीम लाई जाएगी।

इसके तहत जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार मार्च में नई सरेंडर और रिहैबिलिटेशन स्कीम लाने जा रही है। जिससे प्रदेश के भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाया जा सके।

अब रीइंटिग्रेशन स्कीम के तहत जम्मू सरकार ऐसे परिवार और दोस्तों को भी सम्मानित करेगी, जो आतंक के रास्ते पर भटके युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेंगे।

सरेंडर स्कीम के बारे में पूछने पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया, अभी इसके नाम में बदलाव पर विचार चल रहा है। सरेंडर शब्द से नेगेटिव छवि बनती है, इसे रीइंटिग्रेशन स्कीम कहा जा सकता है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इससे घाटी में शांति कायम करने में मदद मिलेगी। मिली जानकारी के अनुसार रीइंटिग्रेशन स्कीम गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आर्मी और सीआरपीएफ का सांझा प्रयास होगा।

ड्राफ्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित स्कीम उन लोगों को सम्मानित करेगी जो भटके युवाओ के घर लौटने में मदद करेंगे। सरकार की यह जिम्मेदारी होगी कि आतंक का रास्ता छोड़ चुके युवा को रोजगार पाने में कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही सरकार उनके परिवार की सुरक्षा भी तय करेगी।

हाल ही में गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच एक बैठक में भटके युवाओं के पुनर्वास की जरूरत पर बल दिया गया। बैठक में केंद्र सरकार ने महबूबा सरकार को निर्देश दिया था कि कोई ऐसी स्कीम लाई जाए, जिससे घाटी के युवा आतंक की राह छोड़कर वापस लौट आएं।

हाल ही में गृह मंत्रालय ने कहा कि रिहैबिलिटेशन स्कीम के तहत आतंक छोड़ वापस आने वाले युवाओं को आर्थिक मदद और ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वो कोई रोजगार कर सकें, सम्मानजनक जिंदगी जी सकें।

बता दें कि कश्मीर सरकार ने घाटी में साल 2016 में हिंसा के दौरान पैलेट गन से घायल 13 लोगों को दया के आधार पर नौकरियां उपलब्ध कराई हैं।

 

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