जयपुर: शराब विनिर्माताओं के विरूद्ध कड़ी कार्यवाई, जीएसटी वसूली की संभावना

राजस्व सूचना निदेशालय एसडीआरआई ने हाल ही में जयपुर के वीकेआई एवं बहरोड़ में स्थित राज्य के प्रमुख शराब विनिर्माताओं के विरूद्ध जांच कार्यवाई आरम्भ की है, जिसमें बडी मात्रा में जीएसटी वसूली की संभावना है।

जयपुर: राजस्व सूचना निदेशालय एसडीआरआई ने हाल ही में जयपुर के वीकेआई एवं बहरोड़ में स्थित राज्य के प्रमुख शराब विनिर्माताओं के विरूद्ध जांच कार्यवाई आरम्भ की है, जिसमें बडी मात्रा में जीएसटी वसूली की संभावना है। एसडीआरआई को इस संबंध मे जानकारी प्राप्त हुई थी कि राज्य के शराब विनिर्माताओं द्वारा शराब के निर्माण में काम आने वाले रा-मैटेरियल पर भी वैट के अन्तर्गत 5.5 प्रतिशत की दर से कर वसूल किया जा रहा था। जबकि अन्तिम उत्पाद के रूप में केवल निर्मित शराब को वैट के दायरे में रखा गया है।

शराब विनिर्माण का प्रमुख रा-मैटेरियल ई.एन.ए. है। ई.एन.ए. में लगभग 95 प्रतिशत की परिशुद्धता होती है जिसे सीधे तोर पर शराब के रूप में इस्तेमाल नही किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि राज्य में 01 जुलाई 2017 से जीएसटी कानून लागू किया गया है। जीएसटी एक्ट की धारा 9(1) के तहत मानव उपयोग में आने वाली शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसके अतिरिक्त पेट्रोल, डीजल, एवीयेशन टर्बाइन आदि को भी जीएसटी के दायरे बाहर रखा गया है। एसडीआरआई ने अपनी जांच मे पाया कि ई.एन.ए. का उपयोग शराब, फार्मा कम्पनियों एवं सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाली कम्पनियों द्वारा काम में लिया जाता है।

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खरीद-बिक्री पर वैट 5.5 प्रतिशत की दर से वैट वसूल

इस समस्त खरीद-बिक्री पर वैट 5.5 प्रतिशत की दर से वैट वसूल किया जाना पाया गया। जबकि राज्य में जीएसटी लागू होने के पश्चात अंतिम उत्पाद के रूप में केवल शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। ई.एन.ए. को जीएसटी के दायरे से बाहर नही रखा गया तथा ई.एन.ए. जिस पर एचएसएन कोड 2207 की अनुसूची 3 की क्रम संख्या 25 के तहत 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी का दायित्व बनता है।

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शराब विनिर्माताओं द्वारा शराब विनिर्माण हेतु

जबकि स्पष्ट प्रावधान के बावजूद इन शराब विनिर्माताओं द्वारा शराब विनिर्माण हेतु की गई बिक्री एवं औद्योगिक बिक्री पर 18 प्रतिशत जीएसटी के स्थान पर वैट 5.5 प्रतिशत की दर से वैट वसूल किया गया है जबकि इस पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से कर वसूल किया जाना चाहिए था, जिससे राज्य सरकार को 12.5 प्रतिशत की दर से कम राजस्व प्राप्त हुआ। आरंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 500 करोड़ की राशि पर एसडीआरआई अन्तर कर वसूलने हेतु वाणिज्यिक कर विभाग को अनुशंसा भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा एसडीआरआई द्वारा राज्य के अन्य शराब निर्माताओं से भी इस संबंध में भी दस्तावेज एकत्र किये जा रहे है। जिसके पश्चात दस्तावेजों की जांच के उपरान्त करारोपण की कार्यवाई की जाएगी।

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