लंबे समय के बाद जेटली ने संभाला कार्यभार, सामने आई कई चुनौतियाँ

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नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली फिर एक बार वित्त मंत्रालय की कमान संभालने जा रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के चलते वो 3 महीने से अस्वस्थ थे जिसकी वजह उनके स्थान पर केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल उनका कार्यभार संभाल रहे थे। अरुण जेटली ऐसे समय पर वापसी ले रहे हैं है जब आम चुनाव बहुत करीब हैं।

जेटली के पास 6 महीने का समय है और इन 6 महीनों के दौरान उनके सामने बहुत सी चुनौतियां आ गई हैं। इससे पहले कि आम चुनावों की घोषणा कर दी जाये उन्हें आर्थिक स्थिति को सही किया जा सके इसके लिए उन्हें अगले 6 महीनों में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

15 अगस्त को अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। जिसको देखते हुए, पूरी दुनिया की नजरे भारत की तरफ हैं। पीएम ने कुछ आर्थिक जानकारों के हवाले से कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था उठ खड़ी हुई है और अब तेज रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार है।

रेटिंग एजेंसी की मानें तो जहां केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान जीडीपी का 1.9 फीसदी का घाटा उठाना पड़ा था वहीं अब अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में यह घाटा बढ़कर 2.5 फीसदी के पास पहुंच जाएगा। लिहाजा, अब अरुण जेटली की सबसे बड़ी चुनौती है कि आम चुनावों से ठीक पहले और मोदी सरकार के अंतिम वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा की समस्या को कैसे हटाया जाए।

पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 70.32 प्रति डॉलर के स्तर पर चला गया। इसके अलावा बीते कुछ महीनों से रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। जानकारों का दावा है कि वैश्विक स्तर पर संघर्ष के चलते दुनियाभर में लोग अधिक सुरक्षित मुद्रा पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं और इसका नुकसान भारत को उठाना पड़ रहा है।

अपने कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने कई ऐसी योजनाओं का ऐलान किया है जिसका सीधा फायदा आम आदमी तक अभी इसलिए नहीं पहुंच पाया है क्योंकि इन योजनाओं को फाइनेंस करने के तरीकों पर सरकार काम कर रही है. देश में सभी को 2022 तक घर देने, बिजली और पानी देने का वादा अभी पूरा किया जाना है।

वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली को इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखकर ही काम करना होगा।

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