जेटली ने केजरीवाल को झूठा करार दिया

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arun_jaitley_624x351_reutersकेंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि ”अरविंद केजरीवाल झूठ बोलने और दूसरों को बदनाम करने में यक़ीन रखते हैं और वो इसके लिए जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं वो उन्माद की हद तक पहुंच जाता है।”

जेटली ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की ओर से डीडीसीए या दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन मामले में लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब दिया। अपने ब्लॉग पर जेटली ने लिखा, ”डीडीसीए केस ख़ुद से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा प्रचार है। मैंने क्रिकेट प्रशासन 2013 में ही छोड़ दिया था। 2014 या 2015 के कुछ तथ्यों की ओर ध्यान दिलाकर उसमें मुझे नहीं घसीटा जा सकता।”

जेटली ने यह भी कहा ”फेडेरिलज़्म कोई एकतरफ़ा रास्ता नहीं है। कोई राज्य या केंद्रशासित प्रदेश अपने ग़लत व्यवहार से संघीयता के लिए ख़तरा भी बन सकता है।”

डीडीसीए के अधिकारियों ने भी ‘आप’ की ओर से लगाए वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को ख़ारिज किया है। डीडीसीए के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और उसमें आम आदमी पार्टी की ओर से जेटली पर लगाए गए हर आरोप का बिंदुवार जवाब दिया।

जेटली का कहना था, ”सीबीआई एक भ्रष्ट अफसर के कार्यालय में गई, मुख्यमंत्री के दफ्तर या घर नहीं। पिछले कई वर्षों से मेरा क्रिकेट से कोई नाता नहीं है। इतने वर्षों बाद इन्हें अचानक ये कैसे याद आ गया। ये सभी तथ्य नासमझी के आधार पर रखे गए हैं।”

अरुण जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट पर कहा है कि ‘केजरीवाल हिस्टीरिया की हद तक पहुंच जाते हैं।’ किसी तरह के घोटाले की बात को नकाराते हुए जेटली ने यह भी पूछा कि केजरीवाल दाग़ी अफसर को क्यों बचा रहे हैं और दरअसल डीडीसीए विवाद असली मुद्दे से भटकाने की कोशिश भर है।

जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया की डीडीसीए मामले की जांच यूपीए के कार्यकाल में हुई थी और जांच में किसी तरह की गंभीर गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। आरोपों का खंडन करते हुए जेटली ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन पर आज तक किसी ने उंगली नहीं उठाई।
सरकारी कंपनी ने बनवाया स्टेडियम
जेटली ने अपने फेसबुक और फिर मीडिया से बातचीत में कहा कि बाकी महंगे स्टेडियम की तुलना में डीडीसीए ने 114 करोड़ में एक शानदार स्टेडियम बनवाया जिसे सरकारी कंपनी ने ही बनाया। दिल्ली के सीएम की भाषा पर टिप्पणी करते हुए जेटली ने कहा कि पीएम मोदी पर इस्तेमाल की गई केजरीवाल की भाषा मंज़ूर नहीं है। खुद केजरीवाल की भाषा भी संघवाद के खिलाफ है।

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