जनकपुरी पश्चिम: आर.के.आश्रम कॉरिडोर पर पहला यू-गर्डर ढाला गया
यह एक स्टेंडर्ड स्पैन वाला दोहरा यू-गर्डर है जिसमें एक स्पैन की लंबाई 28 मीटर है और एक यू-गर्डर का वजन लगभग 160 टन है. इस समय कोरोना महामारी के चलते अनेक बाधाओं के बावजूद

नयी दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने चौथे चरण के तहत जनकपुरी पश्चिम- आर.के.आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर पहले यू-गर्डर की ढलाई करते हुए आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल की.
इस मेट्रो कॉरिडोर और एलिवेटेड वायाडक्ट निर्माण में बेहद अहम योगदान देने वाले यू-गर्डरों की ढलाई बाहरी रिंग रोड के निकट बनने वाले पुष्पाजंली और दीपाली चौक मेट्रो स्टेशनों के बीच काली माता मंदिर के समीप शुरू की गई है.
यह एक स्टेंडर्ड स्पैन वाला दोहरा यू-गर्डर है जिसमें एक स्पैन की लंबाई 28 मीटर है और एक यू-गर्डर का वजन लगभग 160 टन है. इस समय कोरोना महामारी के चलते अनेक बाधाओं के बावजूद, डीएमआरसी के लिए यह एक प्रमुख उपलब्धि है. यू-गर्डरों की कास्टिंग का कार्य इस वर्ष जून में मुंडका स्थित निर्धारित कास्टिंग यार्ड में शुरु किया गया था.
पूरे विश्व में मेट्रो परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर यू-गर्डरों का उपयोग किया जाता है जिससे निर्माण कार्य में समय की बचत होने के अलावा बेहतर क्वालिटी सुनिश्चित होती है. कास्टिंग के बाद इन गर्डरों को साइट पर लाया जाता है और हाई कैपिसिटी क्रेनों तथा लांचरों की मदद से लांच किया जाता है. इस कांट्रेक्ट में कुल मिलाकर 780 ऐसे यू-गर्डर निर्मित किए जाने की योजना है.
प्री-कास्ट हुए यू-गर्डर प्री-टेन्शंड होते हैं, यू-आकार वाले गर्डरों पर तत्काल ट्रैक बिछाया जा सकता है. इन यू-गर्डरों की कास्टिंग का कार्य बहुत महीन होता है और इसके लिए गहन योजना की आवश्यकता होती है. कास्टिंग प्रोसेस के दौरान समस्त पैमाइश और तकनीकी मापदंडों को बनाए रखने के संबंध में अत्यधिक सावधानी बरते जाने की जरूरत होती है.
करीब 29 किलोमीटर लंबा जनकपुरी पश्चिम – आर.के.आश्रम मार्ग कॉरिडोर मेजेंटा लाइन का विस्तार है जिसमें 22 स्टेशन होंगे. इस सेक्शन का कार्य पिछले वर्ष दिसंबर में शुरु किया गया था.
पर्याप्त कामगार उपलब्ध न होने और अन्य समस्याओं के बावजूद, डीएमआरसी अब तक चौथे चरण सभी तीन कॉरिडोर पर निर्माण कार्य कर रहा है. इस चरण में 46 मेट्रो स्टेशनों वाले तीन विभिन्न कॉरिडोर में 65.10 किलोमीटर की नई मेट्रो लाइनों का निर्माण किया जाएगा. ये नए सेक्शन दिल्ली मेट्रो के पहले से परिचालित सेक्शनों में इंटरकनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगे.
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