Javed Akhtar के जिस्म में रोमांटिक हड्डी नहीं है: शबाना आजमी

आज मशहूर गीतकार, शायर और लेखक जावेद अख्तर का जन्मदिन है। आज जावेद अख्तर 57 साल के हो चुके हैं।

‘’ऊंची इमारतों से मकां मेरा घिर गया, कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए

नमस्कार मैं हूं योगिता शर्मा और आप देख रहे हैं पूरी दुनिया’’

नई दिल्ली: आज उस शख्स का जन्मदिन है जिसके लिखे हुए गीतों पर आपका दिल जोरों से धड़कने लगता है। आपके पैर जमीं पर नाच उठते हैं, और आपके दिल की बात आपके जुंबा तक जा जाती है। जी हां, आज उसी मशहूर गीतकार, शायर और लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) का जन्मदिन है। आज जावेद अख्तर 57 साल के हो चुके हैं।

उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपसे शेयर कर रहे हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक जिसे आप पढ़ना जरूर पसंद करेंगे।  बात करेंगे जावेद खत्तर की लव लाइफ के बारे में, यानी की उनकी और शबाना आजमीं की मैरिड लाइफ के बारे में-

एक इंटरव्यू के दौरान जब शबाना आजमीं से पूछा गया कि आप दोनों का रिश्ता इतना मजबूत कैसे है? तो इसके जवाब में शबाना आजमीं ने कहा कि मुझे लगता है कि हमारे रिश्ते को सिर्फ एक चीज मजबूत  करती है और वो है हमारा दृष्टिकोण का एक होना। कई मतभेदों के बावजूद भी हमारा दृष्टिकोण एक है। हमने बहुत पहले एक दूसरे से यह वादा किया था कि जिस चीज से भी हमारे रिश्ते में तनाव आएगा हम उसे उसी मोमेंट पर छोड़ देंगे।

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वहीं जब शबाना से पूछा गया कि क्या जावेद अख्तर (Javed Akhtar) रोमांटिक हैं तो उसके जवाब में शबाना ने कहा कि मेरे पास कई युवा लड़कियां आती हैं और कहती हैं- ‘ऐसे रोमांटिक गीत लिखने वाले कवि से शादी करना कितना अच्छा होता है ।हालांकि मैं उनकी यह गलहतफैमी को दूर करते हूं। मैं उनको बताती हूं कि जावेद अख्तर के जिस्म में रोमांटिक हड्डी नहीं है। इस पर जावेद का तर्क होता है- ‘यदि आप सर्कस में कलाबाजी करते हैं तो क्या आप अपने घर में भी उलटे लटकेंगे?’

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जावेद खत्तर की कुछ बेहतरीन शायरियां जिसे सुनकर आपका दिल भी धड़कने लग जाएगा-

1-तुमको देखा तो ये ख़याल आया

ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की

आज फिर दिल को हमने समझाया

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे

हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते

वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया

2-तमन्ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे गम है कि मैने जिन्दगगी में कुछ नहीं पाया

ये गम दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे

ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया भर के झगड़े घर के किस्सेत काम की बातें

बला हर एक टल जाए,अगर तुम मिलने आ जाओ

3-जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता

मुझे पामाल* रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता

ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना, हामी भर लेना

बहुत हैं फ़ायदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है

किसी का भी हो सर, क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता

बुलंदी पर इन्हें मिट्टी की ख़ुशबू तक  नहीं आती

ये वो शाखें हैं जिनको अब शजर* अच्छा नहीं लगता

ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नों*, ये भी जला डालो

कि सब बेघर हों और मेरा हो घर, अच्छा नहीं लगता

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