जावेद अख्तर ने खोला जिन्दगी का सबसे बड़ा राज़, कभी भी गीतकार नहीं…

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मुंबई। इंडस्ट्री में जावेद अख्तर को भला कौन नहीं जानता होगा। जाना माना नाम और एक अच्छी पहचान के पीछे एक कहानी छुपी है। जिससे वह आज इस मुकाम तक पहुंचे और खुद को मशहूर हस्तियों में शामिल किया। जावेद पहले एक स्क्रिप्ट राइटर थे और बाद में वह लिरिक्स राइटर बने। इतना ही नहीं इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है और आज हम आपको इसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

जावेद ने अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि साल 1978 में उन्होंने अपनी लाइफ में पहली बार कविता लिखी थी। साथ ही इससे पहले उन्होंने कोई स्क्रिप्ट या कविता क्यों नहीं लिखी इसके बारे में भी बताया। जावेद वह उनके वंश की 7वीं पीढ़ी हैं जो कविता, गाने और बोल लिख रही है। यानि उनके वंश की पिछली 7 पीढ़ियां यही करती रही थीं इसलिए वह ऐसा करने से कतरा रहे थे। जावेद ने बताया कि वह बचपन से ही ऐसे माहौल में रहे थे कि उन्हें 12 की उम्र तक हजारों शेर याद हो गए थे और 20 की उम्र तक यह आंकड़ा लाखों में पहुंच गया था।

जावेद ने यह भी बताया कि उन्हें आज भी इतने शेर-ओ-शायरी व कविताएं याद हैं कि वह कम से कम 8 घंटे तक लगातार दूसरों की कविताएं सुना सकते हैं। अपनी कविताओं को यदि शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कविताएं लिखना उस उम्र में शुरू किया था जिस उम्र तक आते-आते आम तौर पर कविताएं लिखना छोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि क्योंकि वह अपने परिवार के बागी बेटे थे तो उन्होंने अपने परिवार के धंधे को और आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया और यह काम छोड़ दिया।

जावेद ने बताया कि वह तब तक यश चोपड़ा जी के लिए बहुत काम कर चुके थे और क्योंकि यश चोपड़ा को शायरी का काफी शौक था तो वह अक्सर जावेद से शायरियां सुनते थे। एक दिन जावेद उनके पास आए और कहने लगे कि मैं जो फिल्म बना रहा हूं उसका हीरो राइटर है और मैं रेग्यूलर लेखकों से गाने नहीं लिखवाना चाहता हूं कि तुम लिख दो।

जावेद अख्तर कभी भी गीतकार बनने की तमन्ना नहीं रखते थे, लेकिन यश चोपड़ा की जिद पर उन्होंने फिल्म सिलसिला के गीत लिखे। गीत इतने हिट हुए की आज तक लोगों के होंठों पर आ ही जाते हैं।

सिलसिला फिल्म के बाद तो जैसे जावेद साहब के इस करियर का सिलसिला भी चल पड़ा और उनका गीत बढ़ती उम्र के साथ और जवां होता गया साथ ही और इश्कनुमा भी। उन्होंने सिलसिला के अलावा सागर, 1942 अ लव स्टोरी, मिस्टर इंडिया, बॉर्डर, बादशाह, लगान, कल हो ना हो और लक्ष्य जैसी फिल्मों में सुपरहिट संगीत दिए।

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