राजद ने 21 दिसंबर को किया बिहार बंद का आह्वान, तो जदयू ने बताया- सिख समुदाय का अपमान

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पटना: बिहार में विपक्ष की भूमिका निभा रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा 21 दिसंबर को बिहार बंद का आह्वान सूबे में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चलाने वाली जदयू को बिलकुल रास नहीं आया है। जदयू ने राजद के इस कदम को सिख समुदाय के खिलाफ बताया है। राजद ने इस बंद का आह्वान बिहार सरकार की नई रेत खनन नीति के खिलाफ किया है।

जदयू का कहना है कि यह बंद सिख धर्म से जुड़े लोगों का अपमान है। जदयू के प्रवक्ताओं ने यहां शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 23 से 25 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती के समापन समारोह के तहत शुकराना समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह में भाग लेने के लिए देश-विदेश के सिख संप्रदाय के लोग 21 दिसंबर से ही यहां पहुंचने लगेंगे।

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजद का 21 दिसंबर को रेत खनन नीति के विरोध में बुलाया गया बंद सही अर्थो में सिख समुदाय का अपमान है। गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती के उद्घाटन समारोह का उत्कृष्ट आयोजन हुआ था, जिसका सिख समुदाय के लोगों ने प्रशंसा की। इस सफल आयोजन से बिहार का मान-सम्मान बढ़ा। लेकिन बिहार बंद से यहां आने वाले सिख समुदाय के लोगों को परेशानी होगी, जिससे बिहार की छवि खराब होगी।

जदयू के प्रवक्ताओं ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगें की याद दिलाते हुए इस बंद का कांग्रेस द्वारा किए जा रहे समर्थन की भी निंदा की। नीतीश कुमार की पार्टी के प्रवक्ताओं ने लालू प्रसाद की धर्मनिरपेक्षता पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘यह बंद उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि को उजागर करता है।’ जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि राजद के इतिहास को देखते हुए बंदी के दिन यहां आने से लोग डरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू बिहार की छवि को एक बार फिर नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि बिहार की नई रेत खनन नीति के खिलाफ राजद ने बिहार बंद को 18 दिसंबर को बुलाया था, लेकिन बाद में दो राज्यों- हिमाचल प्रदेश और गुजरात में हुए चुनाव के बाद मतगणना उसी दिन होने के कारण इस बंद के लिए 21 दिसंबर की तिथि निश्चित की गई।

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस समारोह के कारण अपनी विकास समीक्षा यात्रा का दूसरा चरण स्थगित कर दिया है।

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