कर्नाटक: बीजेपी की सरकार बनते ही राज्यपाल पर गिरी गाज, सुप्रीम कोर्ट ने किया ये फैसला

नई दिल्ली: भले ही पूर्ण बहुमत से चंद कदम दूर रह जाने के बावजूद कर्नाटक विधानसभा में भाजपा सरकार का वर्चस्व कायम हो गया हो लेकिन बीएस येदियुरप्पा द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से भाजपा को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक हमला भाजपा के ही नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने किया है। दरअसल, कर्नाटक में राज्यपाल द्वारा भाजपा के हित में लिया गया फैसला जेठमलानी को नागवार गुजरा है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

मिली जानकारी के अनुसार, राम जेठमलानी ने राज्यपाल के फैसले को संवैधानिक पद का दुरूपयोग करार देते हुए बीते दिन सुप्रीम कोर्ट में एक शिकायत याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को संज्ञान में लिया और सुनवाई के लिए 18 मई का दिन निश्चित किया है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति ए के सीकरी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ कल (18 मई) इस पर सुनवाई करेगी।

राम जेठमलानी ने अपनी याचिका में राज्यपाल पर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्यपाल का आदेश संवैधानिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग है, इससे वह जिस पर विराजमान हैं उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचा है।” उन्होंने कहा कि वह किसी पार्टी के समर्थन या विरोध में सुप्रीम कोर्ट नहीं आए हैं। बल्कि राज्यपाल ने जिस तरह से फैसला लिया है उससे वह आहत हुए हैं।

उधर, कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बी एस येद्दियुरप्पा ने गुरुवार को कहा कि उन्हें विधानसभा में विश्वास मत जीतने और पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का 100 फीसदी भरोसा है। उन्होंने कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन को अपवित्र बताया और आरोप लगाया कि लोगों ने उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है लेकिन इसके बावजूद वे सत्ता हथियाने की कोशिश में है। येद्दियुरप्पा ने कहा कि मुझे विश्वास मत में जीत हासिल करने और मेरी सरकार के पांच साल पूरे करने का विश्वास है।

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार रातभर चली दुर्लभ कानूनी लड़ाई के बाद शपथ लेने के तुरंत बाद येद्दियुरप्पा ने पहला संवाददाता सम्मेलन संबोधित किया। कांग्रेस-जद (एस) ने सरकार गठन को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। येद्दियुरप्पा के सामने अब 112 विधायकों का समर्थन पेश करने की चुनौती है। भाजपा 12 मई को हुए चुनावों में 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। हालांकि चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

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