जिग्नेश मेवानी ने पीएम मोदी ने किया आग्रह, कहा- दलित हिंसा पर तोड़े चुप्पी

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नई दिल्ली| अपने भड़काऊ भाषण की वजह से कानूनी पचड़े में फंसे गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पीएम के खिलाफ हमलावर रुख अख्तियार करते हुए दलितों के खिलाफ हो रही हिंसा पर चुप्पी तोड़ने का आग्रह किया।

जिग्नेश ने दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोरेगांव-भीमा में घटना स्थल का दौरा किया था और न तो कोई भड़काऊं भाषण ही दिया था। गोरेगांव-भीमा में एक जनवरी को हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

दलित नेता ने कहा कि यदि दलित शोषण के खिलाफ लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें सड़कों पर उतरना होगा। (लेकिन) अगर दलित समाज के एक विधायक को निशाना बनाया जाता है, तो आम आदमी बोलने की हिम्मत कैसे कर सकता है? उन्होंने कहा कि दलितों के खिलाफ हिंसा के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मोदीजी को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। वह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

पुलिस ने गुरुवार को भड़काऊ भाषण देने के आरोप पर मेवानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। कथित तौर पर मेवानी के भड़काऊं भाषण के कारण दलितों और मराठों के बीच जातीय तनाव पैदा हुआ था।

मेवानी ने कहा कि उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले से दलित आक्रोशित हो सकते हैं, जिसके कारण अधिक हिंसा भड़क सकती है। उन्होंने दलितों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह नौ जनवरी को दिल्ली में एक रैली करेंगे।

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