सिर्फ चुनाव के लिए दूसरा निकाह अवैध

nikahपंचायत चुनाव को लेकर मुस्लमानों के दूसरी शादी करने को पंचायत ने गैरकानूनी ठहराया है। हाल ही में एक व्यक्ति ने अपना वर्चस्व बरकरार रखने के लिए अपने साले की पत्नी से निकाह कर लिया था। सत्ता के लोभ में हाल के दिनों में ऐसी घटनाएं हुई थीं।

ऐसे लोगों पर मुस्लिम समाज बड़ी पंचायत कर उनका बहिष्कार करने जा रही है। महिलाएं भी इसके खिलाफ हैं।

पलवल के शेखपुरा स्थित मस्जिद पर मुस्लिम समुदाय की पंचायत की अध्यक्षता करते हुए मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष हाजी यूनुस अहमद ने कहा कि पंचायत चुनाव में अपनी चौधराहट जमाने के लिए मुस्लिम समाज के कुछ लोग पहली पत्नी के होते हुए भी या अपनी बेटी की उम्र की पढ़ी लिखी लड़की से निकाह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहली पत्नी के होते हुए या तलाक होने के चार महीने दस दिन तक इद्दत पर बैठने के बाद ही दूसरा निकाह किया जा सकता है। लेकिन कुछ लोग अपनी चौधराहट के लिए मुस्लिम समाज के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। पंचायत में मौजूद इमाम अतिकुर रहमान ने कहा कि दूसरी शादी तभी कर सकते हैं जब पहली पत्नी की मौत हो चुकी हो या फिर पहली पत्नी से कोई बच्चा न हुआ हो। उसकी इजाजत लेकर ही दूसरा निकाह कर सकते हैं। मुस्लिम समाज पहले अनपढ़ था लेकिन अब ऐसा नहीं है। जो लोग दूसरा निकाह कर रहे हैं ऐसे लोग समाज की रक्षा नहीं कर सकें गे।

अंत में पंचायत ने फैसला किया कि अगर ऐसा करने से लोग नहीं रुके तो पंचायतों के जरिए आंदोलन किया जाएगा। दरअसल पंचायती चुनाव में अपनी चौधराहट बरकरार रखने के लिए मुस्लिम समुदाय के वह लोग दूसरी शादी कर रहे हैं जिनकी पत्नी अनपढ़ है। पंचायत राज एक्ट के तहत सरकार ने चुनाव लड़ने वालों के लिए शिक्षित होना अनिवार्य किया है। इससे मुस्लिम समुदाय के लोग पढ़ी लिखी महिलाओं से पहली पत्नी होने के बावजूद दूसरी शादी कर रहे हैं। इसका बहिष्कार के साथ आंदोलन करने को भी कहा गया है।

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