फूट-फूट कर रोई निर्भया की मां, बोलीं-छूट गया मुजरिम

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली गैंगरेप के एकमात्र जिंदा दोषी को रविवार को रिहा कर दिया जाएगा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उसकी रिहाई के खि‍लाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अब इस मामले में जुवेनाइल बोर्ड ही कोई फैसला करेगा। इस आदेश के बाद निर्भया की मां फूट-फूट कर रोने लगी। कोर्ट के बाहर उन्‍होंने कहा, ‘मेरी बेटी के साथ इंसाफ नहीं हुआ। एक मुजरिम छूट गया। हमारी लाख कोशिशों के बाद भी कोर्ट ने अपराधी को छोड़ दिया।’

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तीन साल पहले 16 दिसंबर को हुई इस घिनौनी वारदात के दौरान आरोपी नाबालिग था। कोर्ट ने अधिकतम कानूनी सजा के तौर पर उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा था। पहले खबर थी कि उसे 21 दिसंबर को रिहा किया जाएगा। लेकिन कोर्ट ने अब 20 दिसंबर की तारीख तय की है।

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बाल सुधार गृह में उसके रहने की अवधि पूरी हो गई है, इसलिए उसे छोड़ा जा रहा है। उसकी रिहाई से गैंगरेप की पीडि़ता के मां-बाप मायूस हाे गए हैं। दो दिन पहले गैंगरेप पीडि़ता की मां ने अपनी बेटी का नाम उजागर किया था। उन्‍होंने कहा था, ‘मेरी बेटी का नाम ज्‍योति सिंह है और मुझे उसका नाम उजागर करने में जरा भी शर्मिंदगी नहीं है। आपको भी उसका नाम लेना चाहिए।’

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ज्‍योति की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा था, ‘हम यह नहीं जानते कि वह 16 साल का है या 18 का। हम केवल यह चाहते हैं कि अपराध इतना निर्दयतापूर्ण है तो सजा के लिए आयु की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।’’

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उधर, इस मामले में दोषी को मदद की पेशकश करने वाली दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार भी निशाने पर आ गई थी। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने नाबालिग दोषी के पुनर्वास की योजना पेश की थी। इसके मुताबिक दिल्ली सरकार उसे 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद और एक सिलाई मशीन देगी ताकि वो दुकान किराए पर लेकर टेलरिंग का काम कर सके। दिल्ली सरकार के इस कदम पर ऐतराज जताते हुए केंद्र ने कहा कि अभी नाबालिग दोषी की मानसिक स्थिति संदिग्ध है। केंद्र चाहता है कि अभी उसे बाल सुधार गृह में ही रखा जाए।

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आरोपी की रिहाई के खिलाफ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। स्वामी ने अपनी याचिका में नाबालिग में सुधार पर संदेह जाते हुए उसे सुधार गृह में ही रखने का अनुरोध किया है।

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