कलयुग में होगा श्री हरी विष्णु का 10वां अवतार, करेंगे संसार से पापियों का विनाश

हमेशा से ऐसी मान्यता रही है की भगवान् किसी न किसी रूप में हर युग में धरती पर जनम लेंगे। जब-जब धरती पर पाप बढ़ेगा तब-तब भगवान् दुष्टों का नाश करने धरती पर अवतार लेंगे। अगर बात करें हिन्दू धर्म की तो भगवान् श्री हरी विष्णु जी ने धरती पर असुरों का विनाश करने के लिए अवतार लिया था। भगवान् श्री हरी जगत के पालनहार हैं। इसका प्रमाण गीता में देखने को मिलता है, श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होगी और अधर्म का बोलबाला बढ़ेगा, तब-तब मैं धरती पर जन्म लेकर और धर्म की स्थापना करुंगा।

हमारे धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह जिक्र किया गया है की भगवान विष्णु के दस अवतार है। इनमें से भगवान के नौ अवतार हो चुके हैं। अब बारी है भगवान ने 10वें अवतार की। लोगों की धारणाएं और मान्यताओं के अनुसार कलयुग के अंत में भगवान विष्णु का कल्कि रूप में दसवां अवतार होगा।

धार्मिक ग्रंथ श्रीमद्भागवतपुराण में भगवान विष्णु के सभी अवतारों की कथाएं विस्तार से लिखित रूप में मौजूद हैं। इस ही पुराण के बारहवें स्कंध के द्वितीय अध्याय में प्रभु के कल्कि अवतार के बारे में भी बताया गया है। जिसमें यह कहा गया है कि ‘सम्भल ग्राम’ में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा।

अगर हम बात करें शाश्त्रों की तो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानि छठी तिथि को यह अवतार होना तय है। कल्कि अवतार के जन्म समय ग्रहों की स्थिति के बारे में कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा, सूर्य तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में गोचर करेगा, गुरू स्वराशि धनु में और शनि अपनी उच्च राशि तुला में विराजमान होगा।

कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। भारत में कल्कि अवतार के कई मंदिर भी हैं, जहां भगवान कल्कि की पूजा होती है। यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है जो अपनी लीला से पूर्व ही पूजे जाने लगे हैं। जयपुर में हवा महल के सामने भगवान कल्कि का प्रसिद्ध मंदिर है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कल्कि के साथ ही उनके घोड़े की प्रतिमा भी स्थापित है। पुराणों में वर्णित कथा के आधार पर कल्कि भगवान के मंदिर का निर्माण सन 1739 ई. में दक्षिणायन शिखर शैली में कराया था।

अब कलयुग में भगवान् कल्कि अवतार लेकर संसार का उद्धार करेंगे और दुष्टों का नाश करेंगे।

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