फ्लोर टेस्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी को लगे तीन बड़े झटके, कांग्रेस में जश्न का माहौल

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नई दिल्ली। कर्नाटक की सियासत में एक रोमांचक फिल्म चल रही है जिसका शायद कल अंत हो जाए। बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी के बार-बार गुजारिश के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने कल शाम 4 का वक़्त दिया है फ्लोर टेस्ट के लिए। कल बीजेपी की किस्मत का फैसल हो जायेगा उसके हाथ में सत्ता रहती या छिन जाती। कोर्ट के इस फैसले बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। इसके साथ कोर्ट ने कुछ ऐसे फैसले किये हैं जो बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के आदेश के साथ कांग्रेस -जेडीएस विधायकों को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया है। वहीं नव निर्वाचित मुख्यमंत्री येदियुरप्पा पर किसी भी तरह के फैसले लेने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक एंग्लो-इंडियन सदस्य के मनोनयन पर भी रोक लगा दिया है।

कोर्ट से बीजेपी को तिहरा झटका 

इस तरह से बीजेपी को तिहरा झटका लगा है। आपको बता दें कि शुक्रवार को कोर्ट में हुई कार्रवाई के दौरान बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील की उन्हें फ्लोर टेस्ट के लिए मोहलत दी जाये, लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग ठुकराते हुए शनिवार 4 बजे का वक़्त फ्लोर टेस्ट के लिए मुकर्र किया।

बता दें कि राज्यपाल वजुभाई वाला ने बहुमत परीक्षण के लिए 15 दिनों का समय दिया था। सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि बीजेपी उनके विधायकों को डरा-धमका रही है उन्हें खरीदने की कोशिश कर रही इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। उनकी मांग थी कि बहुमत परीक्षण की वीडियोग्राफी कराई जाय।

तब कोर्ट ने कर्नाटक के डीजीपी को नवनिर्वाचित विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने और हर एक विधायक को सदन तक सुरक्षित पहुंचाने का निर्देश दिया लेकिन शक्ति परीक्षण का वीडियोग्राफी कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया। इससे पहले कांग्रेस-जेडीएस के वकील सिंघवी ने विधान सभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय से एक सदस्य के नामांकन पर रोक लगाने और अन्य नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगाने की मांग की।

इस बार फिर कोर्ट ने रोक लगा दी साथ ही यह भी आदेश दिया कि बहुमत परीक्षण के बाद येदियुरप्पा कोई नीतिगत फैसले नही ले सकते हैं। कांग्रेस-जेडीएस के वकील सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि बीजेपी के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है इसलिए सरकार बनाने का न्योता उन्हें मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस बात का फैसला नहीं किया जा सकता इसलिए फ्लोर टेस्ट कराना ही सही विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि फ्लोर टेस्ट से पहले प्रोटेम स्पीकर के अगुवाई सभी विधायकों को शपथ दिलाई जाए फिर बहुमत परिक्षण हो।

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