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19 जनवरी को कश्मीरी पंडितों ने नरसंहार स्मरण दिवस मनाया

कश्मीरी: प्रवासी कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) के एक निकाय रिकांसिलिएशन, रिटर्न एंड रिहैबिलिटेशन ने मंगलवार को नरसंहार स्मरण दिवस मनाया और कहा कि इसे मनाने का उद्देश्य राष्ट्रीय समुदाय से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास है। हर वर्ष 19 जनवरी को कश्मीर पंडितों (Kashmiri Pandit) का ये निकाय हिंसा, रंगभेद और अन्य तरह के अत्याचारों से पीड़ित कश्मीरी पंडितों की शहादत और मृतकों को याद करता है।

रिहैबिलिटेशन के अध्यक्ष सतीश महलदार ने कहा, “ये दिन कश्मीरी पंडितों के लिए महत्व रखता है। दुनिया के इतिहास में ये सबसे भयानक अत्याचार, नफरत, अमानवीय और अराजकता से भरी घटना है। नरसंहार स्मरण दिवस हमारे समुदाय के लिए मायने रखता है, क्योंकि जब अल्पसंख्यकों की जातीय सफाई हो रही थी, तब दुनिया इसे चुपचाप देख रही थी।”

उन्होंने कहा कि भारत के अंदर और बाहर इसकी जांच करनी चाहिए कि एक उच्च संस्कृति, उच्च आधुनिक और एक संभावित सभ्य कश्मीरी जीवन वाली जगह को भयावह बनाया गया। 20वीं शताब्दी ने इस भयावह हिंसा और लाखों मासूम कश्मीरियों की हत्या देखी है।

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महालदार ने कहा, “कश्मीर में अल्पसंख्यकों की जातीय सफाई सभी समाजों और संस्थानों कि भंगुरता की झलक है। उन्हें सभी की सुरक्षा और अधिकारों को बचाना चाहिए था, ये दिखाता है कि संस्थान कैसे समाज के एक हिस्से के खिलाफ हो गया।”

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यह घटना उस मानवीय व्यवहार को दिखाती है जिससे सभी समाज प्रभावित हुए हैं। ये नरसंहार स्मरण दिवस हमें हमलावरों के उग्र एक्शन की संभावनाओं को दिखाता है। ये विकास और जागरुकता सिर्फ ये नहीं बताता कि कैसे नफरत और हिंसा ने कब्जा जमाया बल्किस्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में प्रतिरोध, तन्यता और बंधुत्व को भी दिखाता है।

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