जैसे भारत को बचाएगा मोदी, वैसे ही आपके कंप्यूटर को Kaspersky

लखनऊ : जैसे बिना पुलिस के हमारा समाज, बिना मिलिट्री के हमारा देश सुरक्षित नहीं है वैसे ही Kaspersky जैसे उम्दा एंटीवायरस  के बिना हमारा साइबर वर्ल्ड भी असुरक्षित सा है। इस कड़ी में आपकी जानकारी के लिए बता दें की साइबर वर्ल्ड उस आभासी इंटरनेट की दुनिया को कहते हैं, जिस पर इस पेन्डामिक में हम पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं।

एक झटके में लग सकती है अरबों की चपत

असल ज़िंदगी में हम अपनी सुरक्षा किसी न किसी तरह कर लेते हैं। लेकिन साइबर सिक्योरिटी के तहत अपने कंप्यूटर, नेटवर्क सर्वर और डेटा की हिफाज़त करने में नाकाम हो जाते है, जिसका खामियाज़ा हमें हैकिंग के रूप में उठाना पड़ता है। इस कड़ी में रिस्कबेस्ड सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट पर नज़र डालें तो पता चलता है की हमारी इस आभासी दुनिआ में सेंधमारी की घटनाएं दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं। अकेले 2019 के पहले नौ महीनों में ही डेटा चोरी के 7.9 बिलियन मामले सामने आये, जो आज की एडवांस्ड दुनिआ में काफी चौकाने वाली खबर है। इस कड़ी में रिपोर्ट के मुताबिक हैकिंग से सबसे ज़्यादा नुक्सान मेडिकल, रिटेल और पब्लिक इंस्टीटूशन्स को हुआ है। इस कड़ी में एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन जगहों पर ज़्यादातर साइबर अटैक्स इस लिए हुए क्यूंकि यहाँ लोगों की ढेर सारी अहम् जानकारी इक्कठा मिल जाती है। मसलन यहाँ पर मोबाइल नंबर, ईमेल, क्रेडिट कार्ड डिटेल, एड्रेस जैसी कई अहम् जानकारियां जमा होती है।

बिना Kaspersky बेहद आसानी से सिस्टम में घुस सकता है हैकर

इन बढ़ते आंकड़ों के मद्देनज़र हाल ही में इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन ने एक भविष्यवाणी की थी जल्द ही दुनिआ इस खतरे को पहचानेगी और  इस के समाधानों पर बड़े पैमाने पर डॉलर खर्च करेगी। इस कड़ी में ज़रा सी लापरवाही इंसान तो क्या एक देश तक को बर्बाद कर सकती है। जानकारों के मुताबिक इस के लिए हैकर्स को ज़्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती। कंप्यूटर पर एक क्लिक से गैस पाइप लाइन में धमाके से लेकर एक मल्टी नेशनल के शेयर गिराने तक सब कुछ किया जा सकता है। इस के लिए ईमेल, एप्लीकेशन, लिंक, फोटो या स्क्रीन पर दिखने वाली ऐड तक से आपके डिवाइस में वायरस भेजा जा सकता है,जो खुद में कई तरह के होते हैं। मसलन कुछ सिर्फ आपकी जासूसी करते हैं जिन्हे स्पाई वेयर कहा जाता है,कुछ डिवाइस को लॉक कर फिरौती की मांग करते हैं। कुछ तो ऐसे होते हैं जो डिवाइस यूज़र की जानकारी के बगैर उसकी सोशल प्रोफाइल तक में घुस जाते हैं।

दौर के साथ साथ कंप्यूटर वायरस में भी आया है बदलाव

इस कड़ी में मज़े की बात तो यह है की बदलते ज़माने के साथ इन में भी काफी बदलाव आया है। यूके, यू.एस. औरऑस्ट्रेलिया की सिक्योरिटी एजेंसी के मुताबिक यह हर कंप्यूटर, मोबाइल और दूसरे इंटरनेट बेस्ड डिवाइसएस को असर करने का माद्दा रखते हैं। इन में ड्रिडेक्स, रोमांस और इमोटेट काफी खतरनाक हैं। इस कड़ी में आपकी जानकारी के लिए बता दें ड्रिडेक्स एक फिनांशल ट्रोजन है जो डिवाइस में सेव क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड पासवर्ड चुराकर खुद ब खुद फ़र्ज़ी ट्रांज़ैक्शन कर सकता है। वहीँ बेहद खूबसूरत नाम वाला रोमांस स्कैम ऑनलाइन डेटिंग या चैट के बहाने सच्चा प्यार तलश रहे लोगों को ठगता है। इस कड़ी में एफबीआई की एक रिपोर्ट के  मुताबिक साल 2019 में अकेले न्यू मैक्सिको में इस साइबर खतरे ने 114 लोगों को प्रभावित किया था, जिनको $1.6 मिलियन का नुकसान उठाना पड़ा था। इस कड़ी में सबसे खतरनाक और अद्भुत इमोटेट है। यह डिवाइस से डेटा चुराने के बाद अपने पीछे दूसरे मैलवेयर के लिए एक दरवाज़ा खोल देता है, जिससे कोई भी कभी भी आकर डिवाइस को हैक कर सकता है।

अब आप सोच रहे होने कि यह तो हो गई खतरे को बात लेकिन अब इस से बचाव कैसे किया जाये। तो इस कड़ी में आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस के तहत एंडपॉइंट सुरक्षा एक अहम् पहलु है। इस के अंदर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर आपके सभी डेटा, मसलन इमेल्स, फाइल्स को एन्क्रिप्ट कर देता है। जिससे हैकर अगर उन्हें चुरा ले तो उन्हें पढ़ या एक्सेस न कर पाए। इस से डेटा सेफ और आप  नुकसान से मेहफ़ूज़।

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इस के अलावा मजबूत पॉसवर्ड और Kaspersky एंटी वायरस को अपने कंप्यूटर सिस्टम में इंस्टाल कर इन खतरों से आसानी से बचा जा सकता है।

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