कठुआ गैंगरेप मामले में फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट आई सामने, हुआ सबसे बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली। कठुआ गैंगरेप मामले में दिल्ली की फॉरेंसिक लैब (FSL) की रिपोर्ट आ गई है। फॉरेंसिक लैब ने तमाम सबूतों की जांच की है और उसे सच माना है। FSL में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो खून धब्बे मंदिर में मिले थे वो पीड़िता के ही थे।

कठुआ गैंगरेप

इस बात से ये साबित हो गया है कि मंदिर में पीडिता के साथ बलात्कार किया गया था।  साथ ही मंदिर में मिले बाल एक आरोपी शुभम सांगरा के डीएनए से मैच हो गई। साथ इस रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि पीड़िता के कपड़ों में मिले खून के धब्बे भी  धब्बे उसके डीएनए प्रोफाइल से मैच करते हैं।

जानिए क्या है कठुआ मामला
एक 8 साल की छोटी मासूम बच्ची जिसे शायद अभी तक कोई समझ नहीं थी। 10 जनवरी 2018 को कठुआ से अचानक लापता हो जाती है। 12 जनवरी को उसके पिता थाने में अपनी मासूम सी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराते हैं। जिसके बाद 17 जनवरी को मिलती जरुर है लेकिन मृत।

खबरों की माने तो कठुआ से बकरवाल समुदाय को भगाने के लिए उस मासूम को शिकार बनाया गया। फ्ती सरकार ने 23 जनवरी को पूरे मामले को जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच ने एसआईटी बनाई और जांच के बाद 9 अप्रैल को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की। इस मामले में सभी आठ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। 15 पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड मंदिर का पुजारी संजी राम है।

इसकी जांच एसआईटी कर रही थी। जिसमे उसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को जो सबूत मिले थे वो आरोपियों को दोषी साबित करने के काफी नहीं थे। आरोपियों ने कुछ पुलिस वालों से मिलकर सबूतों को नष्ट कर दिया था। कपड़ों पर से खून के धब्बे साफ कर दिए गए थे इसलिए राज्य का फॉरेंसिक लैब भी कपड़ों पर खून के धब्बे तलाशने में विफल रहा था। इसी वजह से एसआईटी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कर पा रही थी। उसके बाद दिल्ली फॉरेंसिक लैब को जांच का जिम्मा सौंपा गया।

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