खालिस्‍तानी नहीं चाहते कि भारत आ सके आतंकवादी परमजीत सिंह ‘पम्मा’

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पम्‍मा
परमजीत सिंह ‘पम्मा’ के फेसबुक प्रोफाइल पर लगा फोटो

नई दिल्ली। बब्‍बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकवादी परमजीत सिंह ‘पम्मा’ का प्रत्‍यर्पण न हो सके, इसके लिए खालिस्‍तान समर्थक पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। पम्‍मा को कुछ दिन पहले पुर्तगाल में गिरफ़तार किया गया है।

इंटेलीजेंस विभाग की रिपोर्ट बताती है कि आतंकवादी पम्‍मा के प्रत्‍यर्पण की कोशिशें नाकाम करने के लिए खालिस्‍तानी समर्थकों ने ब्र‍िटेन और फ्रांस सहित कुछ अन्‍य गुरुद्वारों से करीब 25 लाख रुपए इकट़ठा किए हैं। इस रकम से पम्‍मा के समर्थन में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। रकम जुटाने का सिलसिला जारी है। इंटेलीजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘सिख फॉर जस्टिस’ संगठन का एक शख्स अवतार सिंह 20 दिसंबर को कनाडा से पेरिस पहुंचा है।

मकसद है प्रत्‍यर्पण रोकना

पटियाला में 2010 में हुए डबल बम धमाकों और साल 2009 में राष्ट्रीय सिख संगत के नेता रुल्दा सिंह के मर्डर के लिए वॉन्टेड परमजीत की पुर्तगाल पुलिस के हत्थे चढ़ने के कुछ दिनों बाद ही अवतार सिंह पेरिस पहुंचा है। वहां शमशेर सिंह नामक शख्स ने उसे 4.4 लाख रुपये स्थानीय करेंसी में सौंपे। कहा जा रहा है कि यह रकम फ्रांस के एक गुरुद्वारे के सदस्यों से जुटाई गई थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इसका मकसद परमजीत के भारत प्रत्यर्पण को रोकना है।

टेरर फंडिंग का शक

इसके अलावा ब्रिटेन के गुरुद्वारा अर्जुन देव से 21 लाख रुपये इसी मकसद से जुटाने की भी रिपोर्ट है। भारतीय खुफिया एजेंसी के आला अफसर ने बताया कि सिख फॉर जस्टिस संगठन पर इंटेलिजेंस एजेंसियों की लंबे समय से नजर है। इस संगठन पर टेरर फंडिंग का शक जताया जा रहा है और कनाडा और ब्रिटेन की सरकारों से इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संपर्क किया जाएगा

ये है आतंकवादी परमजीत सिंह पम्‍मा

पम्मा के बारे में पुलिस रिकार्ड बताते हैं कि वह 1992 तक छोटे अपराधों में कथित तौर पर शामिल था, लेकिन 1994-95 में भारत छोडऩे के बाद उसने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया और पम्मा बब्बर खालसा इंटरनेशनल के लिए फंड जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा।
अधिकारियों ने बताया कि परमजीत सिंह प्रतिबंधित बब्बर खालसा इंटरनेशनल का नेता है और ब्रिटेन में रहता था, जहां उसने 2004 में राजनैतिक शरण हासिल की थी। बताया जाता है कि आतंकी जगजीत सिंह हवारा की गिरफ्तारी के बाद परमजीत सिंह को बब्बर खालसा इंटरनेशनल का नया चीफ बताया जाता था। 4 नवंबर 1962 को पंजाब के गुरदासपुर में जन्मे पम्मा को उनके समर्थक भाई साहब के नाम से बुलाते हैं। 1982 में ऑल इंडिया सिख फेडरेशन ज्वॉइन करने के बाद परमजीत उर्फ पम्मा 1983 में डीएवी कॉलेज के अध्यक्ष चुने गए थे।

क्या है बब्बर खालसा…
पंजाब में आतंक की शुरुआत 1978 में निरंकारी और अकालियों के बीच अमृतसर में हुए कत्लेआम से हुई। बाद में 1980 में निरंकारी बाबा की दिल्ली में हत्या कर दी गई थी। इस दौरान गर्म ख्याली संगठनों जैसे बब्बर खालसा और बब्बर खालसा इंटरनेशनल अस्तित्व में आए। इसके बाद पंजाब में आतंकी संगठन सक्रिय हुए और जरनैल सिंह भिंडरवाला ने दरबार साहिब अमृतसर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया इस दौरान पंजाब में आतंक चरम पर था। दरबार साहिब को भिंडरवाला और अन्य आतंकियों से मुक्त कराने के लिए 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ।
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