Kisan Andolan: किसानों को मिला अमेरिका का साथ, जानिए बाइडेन प्रशासन ने क्या कहा?

बाइडेन प्रशासन ने कहा है कि किसी भी देश में शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र की पहचान माना जाता है। कृषि कानूनों को लेकर जो मतभेद हुए हैं उसे बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए

नई दिल्ली: सरकार के नए कृषि कानूनों (Agricultural laws) के विरोध में किसानों का आंदोलन असर सात समुन्दर पार अमेरिका में भी दिखा। पिछले 2 महीनों से किसान दिल्ली में आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन सरकार अभी तक अन्नदाताओं की बात नहीं मानी है। इस मामले में अब अमेरिका (America) के जो बाइडेन प्रशासन ने कहा है कि किसी भी देश में शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र की पहचान माना जाता है। कृषि कानूनों को लेकर जो मतभेद हुए हैं उसे बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए।

कृषि कानूनों का समर्थन

बाइडेन प्रशासन सरकार के नए कृषि कानूनों का स्वागत किया है। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट (State Department) ने किसानों के नए कृषि कानूनों के लेकर अपने पहले प्रतिक्रिया में भारत सरकार की कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा है कि इन कृषि बिलों से कृषि में सुधार आएगा और कृषि अर्थव्यवस्था सुधरेगी। इसके साथ ही भारतीय बाजारों की उपयोगिता भी बढ़ेगी।

किसान आंदोलन के प्रतिक्रिया में अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Vice President Kamala Harris) की भांजी मीना हैरिस ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अभी खतरे में है।

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चौरी चौरा शताब्दी समारोह

PM नरेंद्र मोदी ने चौरी चौरा शताब्दी समारोह में कहा कि हमारे देश की प्रगति का सबसे बड़ा आधार हमारे किसान भी रहे हैं। चौरी-चौरा संग्राम में हमारे किसानों की सबसे बड़ी भूमिका थी, किसान आगे बढ़ें, आत्मनिर्भर बने इसके लिए पिछले 6 सालों में किसानों के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं।

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