जानिए प्रसिद्ध गीतकार गुलजार साहब के बारे में जिन्हें कई बार नवाज़ा जा चूका है राष्ट्रीय पुरस्कार से

हैदराबाद: प्रसिद्ध गीतकार गुलजार एक ऐसा नाम है जो किसी पहचान का मोतहाज नहीं। उन्होंने अपनी कलम के दम पर अपने लिए एक बड़ा मुकाम बनाया। आज न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी गुलजार के काफी फैंस मौजूद हैं। वैसे तो गुलजार की पहचान प्रसिद्ध गीतकार के रूप में है लेकिन उन्होंने पटकथा लेखन, फिल्म निर्देशन, नाट्यकला, कविता लेखन में भी महारत हासिल है। गुलजार साहब का आज जन्मदिन है। उनका जन्म आजादी से पूर्व पाकिस्‍तान में 18 अगस्‍त 1934 को हुआ था। मखमली शब्दों से अपने गजलों में रंग भर देने वाले गुलजार साहब पूरे 86 साल के हो चुके हैं। वहीं इस खास अवसर पर आज हम आपको गुलजार के बारे में कुछ अनसुनी बातें बताएंगे।

 

सिख परिवार में जन्मे गुलजार का असली नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। गुलजार उनका पेन नेम है। गुलजार साहब का जन्म पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के समय उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में आकर बस गया। ऐसे में उनका बचपन काफी दर्दनाक रहा क्योंकि काफी कम उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खोय दिया और पिता का साया भी बचपन में ही सर से उठ गया। फिर दिन गुलजार मुंबई चले आए। शुरुआती दिनों में महानगरी में रहना गुलजार के लिए बहुत मुश्किल रहा| बता दें की गुलजार साहब ने वर्ली में एक गैराज में कार मेकैनिक का काम करना शुरु कर दिया और खाली समय का इस्तेमाल करते हुए बहुत सी कविताएं लिखनी शुरू की थी। फिर उसके बाद उन्होंने गैरेज का काम छोड़ हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार के सहायक के रूप में काम करना शुरू कर दिया। जिसके बाद आधिकारिक तौर पर बिमल राय की फिल्म ‘बंदनी’ के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा।

 

1973 में गीतकार गुलजार ने अभिनेत्री राखी से शादी की थी। शादी के कुछ समय बाद ही उनकी बेटी मेघना पैदा हुईं जोकि आज बॉलीवुड निर्देशक हैं। उन्‍होंने राजी और तलवार जैसी फिल्‍में बनाई हैं। शादी के कुछ वक्‍त बाद ही राखी और गुलजार के बीच दूरियां आ गईं और दोनों अलग हो गए। राखी और गुलजार के अलग होने की वजह एक फिल्‍म थी। गुलजार चाहते थे कि शादी के बाद राखी फिल्‍मों में काम न करें, लेकिन राखी ने फिल्‍म कभी-कभी (1976) में काम करने के लिए हामी भर ली और शूटिंग शुरू कर दी। हालांकि 40 साल से अलग अलग रहने के बाद भी उन्‍होंने तलाक नहीं लिया है।

 

प्यार में पड़ी राखी तब गुलजार की बात मान गईं, लेकिन मन ही मन वह उम्मीद लगाए बैठी थीं कि तीन-चार साल बाद वह गुलजार को मना फिल्मों में लौट आएंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। वह जब भी गुलजार से फिल्मों की बात करती तो वह उन्हें शांत करा देते। राखी को फिल्मों में कास्ट करने के लिए उन दिनों बड़े-बड़े प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उन्हें ऑफर देते थे। ऐसा ही ऑफर मशूहर निर्माता-निर्देशक  यश चोपड़ा ने भी उन्हें दिया, जिसे राखी ने बिना गुलजार से पूछे साइन कर लिया और यही दोनों के अलगाव का कारण बना।

 

गुलजार साहब हर किस्म के गाने लिखने में माहिर हैं। लेकिन उन्हें फिल्मी गाने लिखना कुछ खास पसंद नहीं था। एक इंटरव्यू में गुलजार ने बताया कि शायरी उनका पहला प्यार है, और जब उन्होंने अपने करियर का पहला फिल्मी गीत ‘मोरा गोरा अंग लई ले’ लिखा तो वो फिल्मों के लिए गाने लिखने को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुक नहीं थे, लेकिन फिर एक के बाद एक गाने लिखने का मौका मिलता गया और वो गाने लिखते चले गए। ‘इस मोड़ से आते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते’, ‘मुसाफिर हूं यारों’, ‘आने वाला पल जाने वाला है’, ‘मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास है’ से लेकर ‘कजरारे-कजरारे’ और ‘बीड़ी जलई ले’ जैसे गाने गुलजार के लेखन का ही कमाल हैं। आंधी, मौसम, मिर्जा गालिब (टीवी सीरीज), किरदार जैसी फिल्‍मों का निर्देशन करने वाले गुलजार ने बॉलीवुड की कई फिल्‍मों के लिए गीत लिखे हैं। उनके इस योगदान के लइए उन्‍हें 2004 में पद्मभूषण से नवाजा गया था। इसके अलावा बीस बार फिल्मफेयर और पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं। इसके साथ ही 2010 में उन्हें स्लमडॉग मिलेनियर के गाने ‘जय हो’ के लिए ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। वहीं गुलजार को प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

 

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