जानिए अपनी तुलना दूसरों से करना कितना सही या कितना गलत है, इस आदत को बदलना है जरूरी

नई दिल्ली: आपको हमेशा दूसरे की खूबियों के सामने अपनी खूबियां कम ही होती है.ऐसे में इंसान के प्रभाव में आकर या उसकी सफलताओं से आपको ईर्षा महसूस होती है और बहुत से लोग अपनी इस आदत को कमजोरी मानकर बदल लेते हैं. इंसान हमेशा खुद की तुलना दूसरों के साथ करते रहते हैं. यह प्रक्रिया आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है
लोग यह सोचते हैं कि दूसरों के पास अगर कोई चीज है तो वह आपके पास भी होनी चाहिए. अगर दूसरे का घर बड़ा है तो आपको भी बड़ा घर ही चाहिए. लेकिन क्या यह तुलना करना सुखदायक है? अगर आपको किसी तुलना से प्रेरणा मिल रही है तो फिर यह सही हो सकती है.

 

मगर आप इस तुलना को गलत तरीके से देखते हैं तो आप खुद को हमेशा दूसरों से कम और छोटा ही समझेंगे. इससे आपके मन में नकारात्मकता बढ़ती है. क्यों आप अक्सर खुद को दूसरों की तुलना करते हुए देखना चाहते हैं? एक पुरानी कहावत के अनुसार ,”अपने दुख से दुखी ना होकर दूसरे के सुख से दुखी होना.” ऐसे में आपको अपनी अचीवमैंट्स दूसरों की तुलना में हमेशा कम ही लगती हैं इसलिए आप खुद को हीन समझने लगते हैं, तो आइए आज हम आपको कुछ जरूरी  टिप्स बताने जा रहे हैं, जिनके अपनाकर आप खुद की तुलना दूसरों से करने की आदत से बच  सकते हैं.

 

 

अपने खुद के बेस्ट फ्रेंड बनें
आपका खुद से बेहतर मित्र कोई और नही बन सकता क्योंकि आपको पता हैं कि आप के लिए क्या सही और क्या गलत है. इसके आप खुद के ही बेस्ट फ्रेंड बन जाइए. जब आप तुलना खुद से ही करते हैं तो आप कभी निराश नहीं होते हैं और इससे आपको पहले से बेहतर बनने की प्रेरणा भी मिलती है. इसलिए आपको थोड़ा समय खुद के साथ बिताना चाहिए. तभी आप जान पाएंगे कि आप कितने अच्छे इंसान हैं.

 

 

अपनी अचीवमेंट्स का रिकार्ड रखें
जब कभी आप निराशा महसूस करें, तो ऐसे में आप अपनी पुरानी उपलब्धियों को याद करना सीखें. आप को अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस होता है. तब आप को महसूस करेंगे कि आप किसी से भी कम नहीं हैं. अपनी उपलब्धियों के लिए खुद को शाबाशी देनी सीखें न कि हर वक्त अपने फेलियर्स का रोना रोएं.

 

सेल्फ केयर करें
आप को अपनी सेल्फ केयर पर बेहद ध्यान देना चाहिए. आप खुद को साफ सुथरा रखें. हेल्दी भोजन करें. हमेशा मोटिवेट रहें. अपनी सेल्फ केयर  के लिए आप योगा या मेडिटेशन कर सकते हैं इससे आपके मन को शांति मिलती है. यह एक खुद  को खुद से मिलाने की प्रक्रिया होती है. अपने बुरे वक्त को भुलाना आसान नहीं होता. लेकिन आप नेगेटिव परिस्थितियों को खुद पर हावी न होने दें. ऐसे में आप अपने दिमाग को शांत रखें और हमेशा खुश रहने की कोशिश करें. इससे आपको आत्म बल और स्ट्रैंथ मिलती है. अगर आप एक खुशहाल और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं तो  दूसरों से जलना छोड़ दें. अपनी खुबियों को जानने की कोशिश करें. अपनी पीट खुद थपथपायें. खुश रहने के कारणों को तलाशें. खुद की दूसरों से तुलना करना छोड़ दें

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