जानिए Saree कैसे बदल रही है मध्य प्रदेश के इन आदिवासिओं की ज़िंदगी

भोपाल : कुछ दिन पहले तक पच्चीस साल की सीता वसुनिया मांडू के एक शांत शहर की रहने वाली अनजान आदिवासी महिला थी। लेकिन आज वह किसी पहचान की मुहताज नहीं हैं। इस फेम की वजह है सुनहरी माहेश्वरी सिल्क Saree में खींची गई उनकी एक तस्वीर जिसे हाल ही में वोग इटालिया मैगज़ीन के डिजिटल एडिशन के लिए चुना गया था।

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सीता की तरह पड़ोस के गांव सुलीबार्डी से आने वाली किरण दावरे जो माइक्रोबायोलॉजी की छात्रा भी रही हैं। कभी एकड़ भर ज़मीन में खेती करने वाली किरण आज मुंबई के बड़े बड़े मॉडलिंग असाइनमेंट पर काम कर रही हैं। और इस सफलता थी खुद की बनाई साड़ी में खींची गई एक तस्वीर जिसने फैशन वर्ल्ड में धूम मचा दी थी।

Saree बदल रही है इन लोगों का कल

सीता और किरण दस आदिवासी महिलाओं के ग्रुप का हिस्सा हैं जो फिनांशल और सोशल इंडिपेंडेंस की अपनी कहानियों साड़ी के ज़रिये दुनिया को सुना रही हैं।

असल में पूरा मामला यह है की मध्य प्रदेश सरकार ने रिसेंटलीस्टेट  में एक जिला एक उत्पाद स्कीम लांच की थी।  जिसका मकसद ट्राइबल लोगों को अपनी कला और कल्चर को आज के मॉडर्न कलेवर के साथ दुनिया के सामने पेश करने के लिए एक प्लेटफार्म प्रोवाइड है। आज यह लोग नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी की गाइडेंस में अपने  ट्रेडिशनल बाग डिजाइन के मॉडर्न अवतार से फैशन की दुनिया में धूम मचाए हुए हैं।

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