जानिए कैसे गुजरात का Scrap हज़म किये जा रहे हैं पाकिस्तान,बांग्लादेश

गांधीनगर : गुजरात में शिप रीसाइक्लिंग का बिज़नेस आज कल डाउन है। गुजरात के सबसे बड़े Scrap यार्ड अलंग शिप रिसाइकलिंग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रमेश मेंडपा बताते हैं कि पहले जहाँ औसतन 30 से 35 जहाज अलंग आते थे। पड़ोसी देशों की वजह से अब यह आंकड़ा 12 तक सिकुड़ गया है। इस की वजह हैं पाकिस्तान और बांग्लादेश जो Scrap के लिए 460 से 470 डॉलर प्रति टन कीमत  तक देने को तैयार हैं।

ग्रीन गाइडलाइन्स बन रही हैं अड़चन

गुजरात के साथ परेशानी ये है की भारत में शिपब्रेकिंग के लिए कुछ ग्रीन गाइडलाइन्स बनाई गई है,जिसे हर स्क्रैपर्स को फॉलो करना ही होता है। इसी से वो इतने महंगे में खरीद कर मुनाफा नहीं कमा सकते। जबकि पडोसी देशों में ऐसा कोई नियम नहीं है और वो लगातार शिप स्क्रैप खरीदे जा रहे हैं।

बिज़नेस की उम्मीद पर फिर गया है पानी

लॉकडाउन के बाद, अलंग में जहाज रीसाइक्लिंग के व्यापारिओं को तगड़े बिज़नेस की उम्मीद थी लेकिन ग्रीन गाइडलाइन्स की वजह से व्यापार का बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में चला जा रहा है। रमेश मेंडपा ने ये भी कहा कि है कि राज्य सरकार और गुजरात मेरीटाइम बोर्ड को टैक्स में थोड़ी कमी कर व्यापारिओं को रहत देने के बारे में सोचने  की जरूरत है क्योंकि सेंट्रल गवर्नमेंट अगले एक दो सालों में अलंग की 50 लाख टन प्रति वर्ष स्क्रैप डीलिंग क्षमता को दोगुना करने की प्रक्रिया में है। इस मकसद के लिए, सेंट्रल फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 1724 करोड़ रुपये का एलान भी किया है। मौजूदा समय में अलंग में 153 स्क्रैपिंग यूनिट एक्टिव हैं जो लगभग पांच लाख लोगों को  रोजगार प्रदान कर रहा है।

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