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जानिए कैसे किया जाता है असली-नकली रेमडेसिविर injection में अंतर

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस इंफेक्शन के मामले बढ़ने के बाद ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर छीनाझपटी का दौर शुरू हो गया है। इस समय देश मे ऑक्सीजन के बाद अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा मांग है तो वो है रेमडेसिविर injection । जानकरों के मुताबिक कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाला रेमडेसिविर इन दिनों कई जगह तय कीमत से हज़ार गुना ज्यादा कीमत पर बिक रही है।

उम्दा मुनाफे के मद्देनज़र नकली  injection बेच रहे लोग

इतना ही नहीं देश के कई राज्यों मसलन- दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत अन्य से नकली रेमडेसिविर की शिकायतें भी आ रही हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कुछ लोगों को नकली रेमडेसिविर बेचने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया है। ऐसे में अगर इसकी सहीं से पहचान नहीं की गई तो नकली रेमडिसिविर जानलेवा साबित हो सकता है।

लोगों को सावधान करने के लिए दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने सिखाया  कि नकली और असली रेमडेसिविर की पहचान कैसे करें । उन्होंने नकली पैकेट पर मौजूद कुछ निशानियों की तरफ इशारा किया है, जो इसे असली पैकेट से अलग करने में मदद कर सकते हैं।

नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले Rx नहीं लिखा हुआ है। इसके अलावा असली रेमडेसिविर पर 100 mg/Vial लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर 100 mg/vial लिखा हुआ है। यानी केवल Capital V का अंतर है।असली पैकेट पर For use in लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर for use in लिखा हुआ है। यानी दोनों में सिर्फ Capital F का अंतर है।असली पैकेट के पीछे वार्निंग लेबल लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट पर वार्निंग लेबल काले रंग में है।

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