जानिए इस गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें गुरु की उपासना, मिलेगी अपार सफलता

नई दिल्ली। गुरु शब्द हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में गुरु शिष्य परंपरा सदियो ही पुरानी है और सिख धर्म में तो सबसे ज्यादा महत्व उनके दसों गुरुओं को दिया जाता है।जो हमें ज्ञान का प्रकाश दे वह गुरु है, जो हमें अंधकार से दूर ले जाए वह गुरु है, जो निराशा में भी साहस भर दे वह गुरु है।

गुरु की महिमा का बखान शायद ही कोई शब्दों में कर पाया होगा। शास्त्रों में तो गुरु को ईस्ट ईश्वर के समान माना गया है और ईश्वर की हमेशा पूजा अर्चना की जाती है उनका सम्मान किया जाता है ऐसा ही  पर्व भारतवर्ष में भी मनाया जाता है जिसे हम सब गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से जानते हैं।

वैसे तो गुरु के मौजूद रहने पर किसी भी दिन उनकी पूजा की जानी चाहिए। किंतु पूरे विश्व में आषाढ; मास की पूर्णिमा के दिन विधिवत गुरु की पूजा करने का विधान है। इस पूर्णिमा को इतनी श्रेष्ठता प्राप्त है कि इस एकमात्र पूर्णिमा का पालन करने से ही वर्ष भर की पूर्णिमाओं का फल प्राप्त होता है।

ये एक ऐसा पर्व है, जिसमें हम अपने गुरुजनों, महापुरुषों, माता-पिता एवं श्रेष्ठजनों के लिए कृतज्ञता और आभार व्यक्त करते हैं। गुरु पूर्णिमा की सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करके एवं स्नानादि करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें।

अब घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर पटिए पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं। व्यासजी, ब्रह्माजी, शुकदेवजी, गोविंद स्वामीजी और शंकराचार्यजी के नाम अथवा मंत्र से पूजा का आवाहन करें। अंत में अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करें।

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