जानिए कैसे काम करता है ट्रैफिक कैमरा, इनसे बचना कतई संभव नहीं

आप देश के किसी बड़े मेट्रो शहर में रह रहे हैं। तो आपने ट्रैफिक लाईट के आसपास कई कैमरे लगे हुए देखें होंगे।

नई दिल्ली: आप देश के किसी बड़े मेट्रो शहर में रह रहे हैं। तो आपने ट्रैफिक लाईट ( Traffic light ) के आसपास कई कैमरे लगे हुए देखें होंगे। अगर आप सड़क के नियमों को तोड़ते हैं या ओवर स्पीड ( Over speed ) वाहन चलाते हैं तो ट्रैफिक पुलिस ( Traffic police ) की कैमरे से आपका बचना मुश्किल है। कैमरा खुद आपका चालान जनरेट करके आपके घर के पते पर भेज देता है और आपको जुर्माना भरना पड़ता है।

ट्रैफिक उल्लंघन का पता लगाने के लिए सड़क पर 2 मेगापिक्सल ( Megapixels ) और हाई रेजोल्यूशन ( High resolution ) के कैमरे लगाए जाते हैं। ये कैमरे 60 डिग्री तक आसानी तक घूम सकते हैं। इसलिए ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते समय इनसे बचना मुश्किल होता है। इन कैमरों से वाहन की रफ्तार पता करना बहुत ही आसान होता है।

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कंट्रोल रूम रुम से किया जाता है ऑपरेट 

ट्रैफिक कैमरा (Traffic camera ) को ट्रैफिक कंट्रोल रूम से ऑपरेट किया जाता है। इसके लिए डेटा एन्क्रिप्ट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं इस प्रणाली में फोटो और वीडियो को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित भी रखा जाता है. जिससे कभी विवाद होने पर इसे न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया जा सके।

यदि आपने भी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है। तो ट्रैफिक कंट्रोल रूम से आपके मोबाइल पर SMS के जरिए ई-चालान भेज दिया जाता है। यदि आप तय समय पर चालान की राशि जमा नहीं करेंगे तो आपका वाहन जब्त किया जा सकता है। वहीं आपको बता दें ट्रैफिक कंट्रोल रूम ( Traffic control room ) में 24×7 काम किया जाता है।

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