जानिए सरल भाषा में किसानों की मांग और सरकार का कृषि कानून (Farmers’ Protest)

केंद्र सरकार ने पार्लियामेंट में किसानों को लेकर तीन बिल पास किए हैं। इस बिल का किसान और विपक्ष लगातार विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं। जानिए बिल में ऐसा क्या है जिसको लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं

लखनऊ: कहते हैं हमें अपने हक की लड़ाई जरूर लड़नी चाहिए। क्योंकि बिना लड़े हमें हमारा हक नहीं मिलता। लेकिन अपना हक मांगते-मांगते आपको कितना वक्त लग जाएगा ये कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ हाल हो रहा है पंजाब- हरयाणा के किसानों का। बीते साल के 26 नवंबर से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में कई किसानों ने अपनी जान भी गंवा दी। लेकिन फिर भी किसान अपनी मांग से पीछे हटते हुए नजर नहीं आ रहे है। पंजाब सरकार के मुताबिक अब तक करीब 53 किसानों की जान जा चुकी है। बता दें कि इन किसानों की मांग है कि सरकार द्वारा लगाए गए किसान कृषि कानून बिल को वापस लिया जाए।

जानिए सरल भाषा में किसानों की मांग और सरकार का कृषि कानून
किसान

क्या है किसान कृषि कानून बिल

केंद्र सरकार ने पार्लियामेंट में किसानों को लेकर तीन बिल पास किए हैं। इस बिल का किसान और विपक्ष लगातार विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं। जानिए बिल में ऐसा क्या है जिसको लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं –

पहला बिल

यह बिल कहता है कि किसान अपनी फसल को पूरे मुल्क में कहीं भी बेच सकते हैं। साथ ही एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच कारोबार को बढ़ाने की भी बात कही गई है। साथ ही मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च करने की बात कही गई है।

दूसरा बिल
इस बिल में सरकार ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया है। इसका मतलब कि यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करना है। कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है।

तीसरा बिल
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को जरूरी चीजों की फहरिस्त से हटाने का प्रोविजन है। सरकार का मानना है कि इस बिल के प्रोविज़न से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा।

क्या है किसानों की मांग?

दिल्ली … पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि सरकार उन्हें गारंटी दे कि भविष्य में उनकी फसल को जो भी खरीदें वो उन्हें एमएसपी या उससे ऊपर दाम पर ही खरीदें। फिर चाहे फसल खरीदने वाला व्यापारी हो , सरकार हो या फिर कंपनी ही क्यों न हो।

नए बिल पर किसानों को क्यों है संदेह?

वहीं विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को डर है कि कहीं ऐसा न हो कि सरकार किसानों से गेहूं और धान जैसी फसलों की खरीद को कम करते –करते उसे बंद न कर दे। किसान का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो उन्हें पूरी तरह से बाजार पर ही निर्भर होना पड़ेगा। साथ ही सरकार के इस नए कानून से सिर्फ निजी कंपनियों का ही फायदा होगा। वहीं निजी कंपनियों को फायदा होगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य के खत्म होने से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी।

जानिए सरल भाषा में किसानों की मांग और सरकार का कृषि कानून
किसान

कितने किसानों की गई जान?

26 नवंबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों ने अपनी जान गंवा दी है। अब तक करीब 53 किसानों की जान जा चुकी है। जिसमें से करीब 20 किसानों की जान पंजाब में और 33 की दिल्ली की सीमाओं पर गई। जहां कुछ किसानों ने परिस्थिति में सुधार न आते देख खुदकुशी कर ली तो कुछ की तेज ठंड के वजह से मौत हो गई। वहीं कुछ ही सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।

प्रदर्शन में सबसे आगे पंजाब-हरियाणा के किसान क्यों ?

हर किसी के मन में ये सवाल जरूर उठ रहा है कि इस प्रदर्शन में सिर्फ पंजाब-हरयाणा के ही किसान क्यों नजर आ रहे हैं। अगर आपके मन में भी यहीं सवाल चल रहा है तो आपको बता दें कि ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार सबसे ज्यादा गेहूं और चावल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है। इसी वजह से सबसे ज्यादा पंजाब-हरयाणा के किसान से इस बिल को लेकर आशंकित है। किसानों को आशंका है कि अगर सरकार एमएसपी खत्म कर देगी तो उनका क्या होगा?।

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