Kargil Vijay Diwas की 22वीं सालगिरह पर जानें इस दिन का इतिहास, ऐसे हुई हिंदुस्तान की जीत

कारगिल विजय दिवस की 22वीं सालगिरह के अवसर पर तीनों सेनाओं के प्रमुख ने युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली: कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) की 22वीं सालगिरह के अवसर पर सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया, नेवी के वाइस चीफ वाइस एडमिरल जी. अशोक कुमार और CISC के वाइस एडमिरल अतुल जैन ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बारामूला के डैगर युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। कारगिल युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों को लद्दाख (Ladakh) में कारगिल के वॉर मेमोरियल में श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान लद्दाख से BJP सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने भी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है। CDS (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल बिपिन रावत ने भी युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

बेंगलुरु (Bangalore) में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा (B.S. Yediyurappa) ने कारगिल वॉर मेमोरियल पर कारगिल युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पिघलती बर्फ का फायदा

कारगिल युद्ध 60 दिनों से अधिक समय तक लड़ा गया और 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ, जब पाकिस्तानी सेना ने पिघलती बर्फ का फायदा उठाया और दोनों देशों की द्विपक्षीय समझ के साथ विश्वासघात किया कि सर्दियों के मौसम में यह पद अप्राप्य रहेगा। भारत के उच्च चौकियों में से पाकिस्तानी सेना ने युद्ध में शामिल होने से इनकार करते हुए दावा किया कि यह स्वतंत्र कश्मीरी विद्रोही बलों के कारण हुआ था, हालांकि हताहतों के पीछे छोड़े गए दस्तावेजों और बाद में पाकिस्तान के प्रधान मंत्री और सेना प्रमुख के बयानों में जनरल अशरफ राशिद के नेतृत्व में पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों की भागीदारी दिखाई गई थी। कारगिल युद्ध के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों की जान चली गई और यह समाप्त हो गया जब भारत ने पोस्ट पर नियंत्रण हासिल कर लिया और पाकिस्तानी सेना को क्षेत्र से बाहर कर दिया।

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