पूर्व प्रधानमंत्री PV Narasimha Rao की 100वीं जयंती पर जानिए 1991 का राजनीतिक इतिहास

पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की 100वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है

हैदराबाद: पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव (PV Narasimha Rao) की 100वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ( M. Venkaiah Naidu) ने विशाखापट्टनम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव जी की 100वीं जयंती पर कोटि-कोटि नमन। भारत राष्ट्रीय विकास में उनके व्यापक योगदान को याद करता है। उन्हें असाधारण ज्ञान और बुद्धि का वरदान प्राप्त था। उन्होंने बोला पिछले साल जून में मन की बात के दौरान मैंने उनके बारे में जो बात की थी, उसे साझा कर रहा हूं।

पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का पूरा नाम ‘पामुलापति वेंकट नरसिंह राव’ है। उनका जन्म 28 जून 1921 को एक तेलुगु भाषी नियोगी ब्राह्मण परिवार में वारंगल ग्रामीण जिले के नरसंपेट मंडल के लकनेपल्ली गांव में हुआ था। पी.वी. नरसिम्हा राव भारत के राजनेता एवं देश के 10 वें प्रधानमंत्री के रूप में जाने जाते हैं। ‘लाइसेंस राज’ की समाप्ति और भारतीय अर्थनीति में खुलेपन उनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही आरम्भ हुआ। ये आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे है।

 

1991 का आम चुनाव

इनके प्रधानमंत्री बनने में भाग्य का बहुत बड़ा हाथ रहा है। 21 मई 1991 को राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या हो गई थी। ऐसे में सहानुभूति की लहर के कारण कांग्रेस को निश्चय ही लाभ प्राप्त हुआ। 1991 के आम चुनाव दो चरणों में हुए थे। प्रथम चरण के चुनाव राजीव गांधी की हत्या से पूर्व हुए थे और द्वितीय चरण के चुनाव उनकी हत्या के बाद में। प्रथम चरण की तुलना में द्वितीय चरण के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसका प्रमुख कारण राजीव गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर थी।

इस चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं प्राप्त हुआ लेकिन वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। कांग्रेस ने 232 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। फिर नरसिम्हा राव को कांग्रेस संसदीय दल का नेतृत्व प्रदान किया गया। ऐसे में उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। सरकार अल्पमत में थी, लेकिन कांग्रेस ने बहुमत साबित करने के लायक सांसद जुटा लिए और कांग्रेस सरकार ने 5 वर्ष का अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण किया। पीवी नरसिंह राव ने देश की कमान काफी मुश्किल समय में संभाली थी। उस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चिंताजनक स्तर तक कम हो गया था और देश का सोना तक गिरवी रखना पड़ा था। उन्होंने रिजर्व बैंक के अनुभवी गवर्नर डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) को वित्तमंत्री बनाकर देश को आर्थिक भंवर से बाहर निकाला।

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