रात को नींद नहीं आती, सुबह नहीं खुलती आंख, तो ये रिसर्च तुम्हारे लिए है

जर्नल नेचर कम्युनिकेशन  में पब्लिश एक रिसर्च में पाया गया है कि हमारी नींद जीन पर निर्भर करती है। मतलब कि रात को देर तक जागना और सुबह देर तक सोना, ये हमारे जीन की वजह से होता है। जिसे हम चाह कर भी बदल नहीं पाते हैं।

नई दिल्ली: हम सभी का सोने और जागने का समय अलग-अलग होता है। कुछ लोग होते हैं जिन्हें बेड पर लेटते ही नींद आ जाती है वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें रात भर नींद नहीं आती। ऐसे में लोगों के मन में सवाल खड़ा होता है कि क्या रात में सही से नींद न लेना हमारे शरीर पर खराब असर तो नहीं डाल रहा है? अगर आपके मन में भी यहीं सवाल चलता रहता है तो आज आपको आपका जवाब मिलने वाला है।

जर्नल नेचर कम्युनिकेशन  में पब्लिश एक रिसर्च में पाया गया है कि हमारी नींद जीन पर निर्भर करती है। मतलब कि रात को देर तक जागना और सुबह देर तक सोना, ये हमारे जीन की वजह से होता है। जिसे हम चाह कर भी बदल नहीं पाते हैं।

सुबह देर से जगाना

इस रिसर्च को एक ब्रिटेन में यूके बायोबैंक के तहत कराया गया है। इस रिसर्च में कम से कम 7 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। इस रिसर्च में सभी लोगों के हाथ पर wristband activity tracker लगाया गया था। इसमें पाया गया कि मानव जीन के समूह में 351 रीजन्स जल्दी जागने वाले जीन के साथ जुड़े होते हैं। इस रिसर्च में हिस्सा लेने वाले ज्यादातर लोगों के जीन जल्दी जागने वाली प्रवृत्ति के थे।

रिसर्च में इस बात का भी पता चला कि जीन के समूह का लिंक हमारे शरीर के कार्डियन क्लॉक (Cardian Clock) और रेटिना (retina) से जुड़ा होता है। बता दें कि मस्तिष्क, रेटिना के जरिए ही रोशनी का पता लगता है। रेटिना 24 घंटे के चक्र के मुताबिक ही सोने, जागने की बॉडी क्लॉक सेट करती है।

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हालांकि रात और दिन दोनों में सोने से इसका असर नींद की क्वालिटी पर नहीं पड़ता है। साथ ही इस बात को भी क्लीयर किया गया कि रात में ज्यादा देर तक जगने का असर हमारे शरीर के मोटापा पर भी नहीं पड़ता है। न ही इसका डायबिटीज जैसी बीमरी से कोई लेना देना है। हालांकि रात में देर तक जगने से चिंता, अवसाद जैसी समस्याएं आपको घेर सकती हैं।

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