मकर संक्रांति पर जानें पतंग (Kite) उड़ाने का राज?

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के महापर्व पर पीएम मोदी और अमितशाह ने दी बधाई, खिचड़ी में पड़ने वाली काली उड़द दाल भगवान शनि का प्रतीक होता है, पतंग उड़ाने की परंपरा सबसे पहले भगवान श्री राम के समय में शुरू हुई थी

नई दिल्ली: आस्था का महापर्व मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को पूरे देश में बड़े ही हर्षो उल्लास और बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इस पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमितशाह समेत तमाम बड़े नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी है।

PM ने दी शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने ट्वीट कहा कि देशवासियों को मकर संक्रांति की बहुत-बहुत बधाई। मेरी कामना है कि उत्तरायण सूर्यदेव सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करें।

देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि मकर संक्रांति का यह महापर्व सभी देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा एवं उत्तम स्वास्थ्य लेकर आये ऐसी ईश्वर से कामना करता हूँ। मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ।

मकर राशि में सूर्य का आगमन

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) भारत का प्रमुख पर्व है। आस्था का यह महापर्व पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान में मकर संक्रांति का यह पावन त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन से ठंड कम हो जाती है।

 

पोंगल उत्सव

तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कुछ जगहों पर कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहा जाता हैं।

खिचड़ी खाने की परंपरा

मकर संक्रांति के दिन लोग स्नान कर भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। इस दिन श्रद्धालु नदी में डुबकी लगाकर यूर्य देवता कि उपासना करने के साथ दान पुण्य भी करते है। इस महापर्व के दिन मुख्य रुप रूप से खाने में खिचड़ी बनाई जाती है। क्यों कि यह एक पौष्टिक और सुपाच्य आहार है। पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी यह आसानी से पच जाती है। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता।

कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि चावल चंद्रमा का प्रतीक होता है। काली उड़द की दाल को शनि का प्रतीक होता है। कुंडली में ग्रहों की स्थिती मजबूत करने के लिए कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी खानी चाहिए।

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तिल और गुड़ खाने की परंपरा

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने की भी परंपरा है। क्योंकि तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके साथ हि गुड़ खाने से शरीर के अंदर गर्मी बढ़ती है।

पंतग उड़ाने की परंपरा

बच्चें हो या बूंढे हर किसी को पतंग उड़ाना अच्छा लगता है। हर कोई इस दिन पतंग उड़ाना के लिए उत्सुक होता है। ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा सबसे पहले भगवान श्री राम के समय में शुरू हुई थी। मकर संक्रांति के दिन ही प्रभु श्री राम ने पतंग उड़ाई थी और वो पतंग सीधे स्वर्गलोक में चली गई थी। उस पतंग को इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी को मिली। उनको पतंग काफी पसंद आई और उन्होनें पतंग को अपने पास ही रख लिया। जिसके बाद प्रभु श्री राम ने कहा कि वह चित्रकूट में उनके दर्शन कर सकती हैं। हनुमान जी ने भगवान राम का संदेश जयंत को भेजा। जिसके बाद जयंत की पत्नी ने हनुमान जी को पतंग लौटा दी और तब से हि पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हुई।

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