जानिए चंद्रग्रहण की घटना का रहस्य, कब और क्यों होता है घटित?

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दुनिया संसार में निरंतर बदलाव होते रहते हैं। इन बदलावों के साथ हमें बहुत सी चीज़ें देखने को भी मिलती है। हर साल दुनिया में सूर्यग्रहण तथा चंद्रग्रहण भी लगता है जिसका तरह-तरह का प्रभाव देखने को मिलता है। साल 2018 का चंद्रग्रहण इस माह 27 जुलाई को लगने जा रहा हगे जिसे ‘सूतक’ का सही समय भी बताया जा रहा है। ज्योतिषों के अनुसार इस माह आषाढ़ मास की शुक्ल की पूर्णिमा को चंद्रग्रहण लग रहा है।

जानिए चंद्रग्रहण की घटना का रहस्य, कब और क्यों होता है घटित?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार चंद्रग्रहण पर अत्यंत खास संयोग बन रहा है, क्यूंकि ग्रहण के अगले ही दिन पवित्र सावन मास शुरू हो रहा है। बात करें ग्रहण की तो चंद्रग्रहण रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगा जिसकी समाप्ति रात्रि 3 बजकर 5 मिनट पर होगी। जानकारों के अनुसार यह चंद्रग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा।

ग्रहण को लेकर कई बातें कई मान्यताएं सामने आ रहीं हैं। कई सावधानियां कई उपाए  कई तरह के प्रभाव आदि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कब और क्यों होती है चंद्रग्रहण की घटना? अगर नहीं तो हम बताते हैं इसके पीछे का कारण …

साइंस के मुताबिक हमारा सौरमंडल 8 ग्रहों से बना हुआ है। सौरमंडल का हिस्सा हमारी धरती भी है। यह सूर्य से तीसरा ग्रह है। हमारी पृथ्वी के चारों तरफ चंद्रमा घूमता है। चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है और यह पृथ्वी का चक्कर अंडाकार कक्षा में काटता है। पृथ्वी, सूरज और चंद्रमा की गतियों की वजह से ग्रहण पढ़ते हैं। यह छाया का साधारण सा खेल है जो सौरमंडल में होता रहता है।

चंद्रग्रहण होने का कारण
ऐसा कहा जाता है की चंद्रग्रहण का सीधा सा जवाब है कि चंद्रमा का पृथ्वी की ओट में आ जाना। उस स्थिति में सूर्य एक तरफ, चंद्रमा दूसरी तरफ और पृथ्वी बीच में होती है। जब चंद्रमा धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।

चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है
जानकारों के अनुसार चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता है। इसका कारण है कि पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुके होना। यह झुकाव तकरीबन 5 डिग्री है इसलिए हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता। उसके ऊपर या नीचे से निकल जाता है।

चंद्रग्रहण के अलावा यही बात सूर्यग्रहण के लिए भी सच है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होते हैं क्योंकि चंद्रमा का आकार पृथ्वी के आकार के मुकाबले लगभग 4 गुना कम है । इसकी छाया पृथ्वी पर छोटी आकार की पड़ती है इसीलिए पूर्णता की स्थिति में सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है।  लेकिन चंद्र ग्रहण की स्थिति में धरती की छाया चंद्रमा के मुकाबले काफी बड़ी होती है। लिहाजा इससे गुजरने में चंद्रमा को ज्यादा वक्त लगता है।

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