प्लैटलैट्स गिरने की ये होती है वजह, कैसे होता है इलाज

आमतौर पर बुखार होने पर मरीजों में लाल रक्त कणिकाएं(आरबीसी), सफेद रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) और प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं। पर, ऐसी स्थिति लगातार बने रहना साइटोपीनिया की वजह से भी हो सकता है।  हमारे खून में तीन मुख्य भाग होते हैं। पहला-लाल रक्त कणिकाएं जिनका मुख्य काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाना है। दूसरा- श्वेत रक्त कणिकाएं यानी हमारे शरीर की सैनिक जो संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ती हैं। तीसरा-प्लेटलेट्स जो कि खून के थक्का बनने में मददगार होती हैं।

यहाँ आपको ये जानना आवशयक है कि साइटोपीनिया की स्थिति में एक या उससे ज्यादा रक्त के अहम अवयवों का स्तर नीचे गिरता जाता है। साइटोपीनिया के एक प्रकार यानी एनीमिया को हम सभी जानते हैं। ऐसे ही ल्यूकोपीनिया होता है जिसमें श्वेत रक्त कणिकाओं का स्तर गिरता है। थ्राम्बोसाइटोपीनिया में प्लेटलेट्स तो पैंसीटोपीनिया में इन तीनों जरूरी अवयवों की कमी होती है।अगर लगातार स्थिति लगातार बनी रहे तो विटामिन बी-12 की जांच करानी चाहिए।

इसके साथ ही साथ आपको अपने स्वस्थ्य क लिए भी ध्यान रखना चाहिए कि उम्र बढ़ने और मासिक बंद होने के बाद महिलाओं को हड़्िडयों की खासतौर से देखभाल की जरूरत होती है। भोजन में कैल्शियम, विटामिन डी-थ्री का सेवन बढ़ाने के साथ ही नियमित व्यायाम जरूरी होता है। वहीं कोई मरीज लंबे समय से बिस्तर पर हैं तो बोन लॉस की वजह से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि वह शराब-तंबाकू का सेवन करता है तो हड्डी टूटने की आशंका और बढ़ जाती है।

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