जानिए, क्या रणनिति होगी कांग्रेस के घोषणा पत्र में ,कल जरी हो सकता है जारी

नई दिल्ली: कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी करने जा रही है। माना जा रहा है कि वह दल-बदल कानून को सख्त बनाए जाने की घोषणा भी की जा सकती है, ताकि दल बदलने पर सांसद स्वतः ही अयोग्य घोषित हो जाए। इसके अलावा गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी, अप्रत्यक्ष कर में बदलाव सहित कई अन्य घोषणाएं भी हो सकती हैं।

कांग्रेस अपना घोषणा पत्र मंगलवार को पेश करने जा रही है। इसमें प्रमुख तौर पर अर्धसैनिक बलों के सैनिकों को शहीद का दर्जा देने, सरकारी नौकरियों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने, किसानों की कर्जमाफी और फेक न्यूज के खिलाफ सख्त कानून बनाने के वादे शामिल हो सकते हैं।

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कांग्रेस स्वास्थ्य को अधिकार के रूप में शामिल करने के साथ ही इस पर खर्च की सीमा बढ़ाएगी। इसे बढ़ाकर जीडीपी के तीन फीसदी तक करने की घोषणा करने की संभावना है। शिक्षा के मामले में भी खर्च को बढ़ाकर जीडीपी के छह फीसदी तक ले जाने की बात हो सकती है।

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कृषि क्षेत्र में जारी संकट को नियंत्रित करने के लिए कांग्रेस कृषि और शिक्षा परिषद बनाने की घोषणा कर सकती है। घोषणा पत्र में किसान क्रेडिट कार्ड तक किसान की पहुंच आसान बनाने की बात भी की जाएगी। इसके अलावा इसमें उद्योग जगत से जुड़ी घोषणाएं भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए एंजेल टैक्स को खत्म करना। एंजेल टैक्स स्टार्ट-अप के शेयरों पर लगने वाला कर है।

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कांग्रेस के घोषणा पत्र में जिस विषय पर सबसे ज्यादा फोकस होने की संभावना है वो गरीबी हटाने के लाई गई न्यूनतम आय गारंटी योजना है। पार्टी पहले ही इसको लेकर काफी कुछ सामने ला चुकी है। कांग्रेस इस योजना को ‘न्यूनतम आय योजना’ (न्याय) के नाम से सामने ला रही है, जिसके मुताबिक 20 फीसदी गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती की बात भी कही थी।

उन्होंने कहा था कि सरकारी क्षेत्र में आज 22 लाख पद खाली पड़े हैं। हम इस पदों को 31 मार्च 2020 तक भर देंगे। उन्होंने केंद्र की ओर से राज्यों को स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के लिए दिए जाने वाले फंड को नौकरियों से जोड़ने की बात कही थी।

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इस मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि पार्टी ने अपने मसौदा घोषणापत्र में यह प्रस्ताव दिया है कि किसी विधानसभा के स्पीकर को अब दोषियों को अयोग्य ठहराने का अधिकार नहीं होना चाहिए। बताते चलें कि दिसंबर 2018 के राज्य चुनावों के बाद से कांग्रेस से 19 में से नौ विधायक तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) में चले गए हैं।

2014 के बाद से जब कांग्रेस ने सत्ता खो दी, तो उसके बाद अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में कई विधायकों ने पार्टी को छोड़ दिया। बताते चलें कि दलबदल विरोधी कानून को 1985 में 52 वें संशोधन के माध्यम से 10 वीं अनुसूची के रूप में संविधान में जोड़ा गया था। उस समय राजीव गांधी प्रधान मंत्री थे।

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