जानिए फांसी से पहले जल्लाद कैदी के कान के पास आकर क्या कहता है और क्या होते हैं नियम?

फांसी की सजा को लेकर आपके मन में कई तरह के सवाल होते हैं कि फांसी की सजा के क्या नियम होते हैं और जल्लाद फांसी देते समय मुजरिम के कान के पास आकर क्या कहता है।

नई दिल्ली: निर्भया के गुनहगारों को फांसी की सजा देने के बाद अब शबनम को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। शबनम आजाद भारत की पहली महिला हैं जिन्हें फांसी की सजा दी जाएगी। लेकिन फांसी की सजा को लेकर आपके मन में कई तरह के सवाल होते हैं कि फांसी की सजा के क्या नियम होते हैं और जल्लाद फांसी देते समय मुजरिम के कान के पास आकर क्या कहता है। इसके बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होगा तो आज हम अपनी इस खबर में आपके सवाल के जवाब दे देंगे।

देश में फांसी देने के नियम

आरोपी को फांसी देने के लिए पहले उसके आरोपों की गहनता से जांच की जाती है। 1983 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक केवल ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयरट’ के केस में ही फांसी की सजा का प्रावधान है। फांसी की सजा का ऐलान होने के बाद डेथ वारंट जारी होता है। लेकिन इससे पहले अगर आरोपी चाहे तो राष्ट्रपति को दया याचिका देकर फांसी पर रोक लगाने की गुंहार कर सकती है। लेकिन अगर राष्ट्रपति के पास से उसकी दया याचिका खारिज हो जाती है तो उसके खिलाफ डेथ वारंट जारी हो जाता है।

क्या होता है डेथ वारंट?

आरोपी की राष्ट्रपति के पास से दया याचिका खारिज होने के बाद उसके खिलाफ डेथ वारंट जारी किया जाता है। डेथ वारंट में फांसी की तारीख और समय तय होता है। इसके बाद फांसी दिए जाने की आगे की प्रक्रिया जेल मैनुअल के हिसाब से होती है। वहीं डेथ वारंट जारी होने के बाद मुजरिम को फांसी की तारीख के बारे में सूचना दी जाती है।

कैसे होती है तैयारी

डेथ वारंट जारी होने के बाद जहां पर आरोपी को फांसी दी जाती है, वहां पर प्रशासन तैयारियां शुरु कर देते है। फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी के वजन का पुतला लटकाकर ट्रायल करता है और इसी हिसाब से फांसी देने वाली रस्सी का ऑर्डर दिया जाता है। वहीं फांसी देने के एक दिन पहले जल्लाद रस्सी, लिवर सब कुछ चेक करता है।

15 दिन पहले दी जाती है सूचना

मुजरिम को फांसी देने से 15 दिन पहले परिजनों को इस बात की सूचना दी जाती है। जिससे वह उससे आखिरी बार मिल सके। इस दौरान जेल की सुरक्षा को बढ़ा दिया जाता है और कैदी की निगरानी के लिए गार्ड लगा दिया जाता है।

सुबह दी जाती है फांसी

कैदी को फांसी सुबह के समय ही दी जाती है, ऐसा इसलिए क्योंकि सुबह सब कैदी सो रहे होते हैं और कैदी को पूरा दिन इंतजार नहीं करना पड़ता। वहीं आरोपी की जिस दिन फांसी होती है। उसी दिन उसको नहलाया जाता है। इसके बाद उसे फांसी वाली जगह पर लाया जाता है। फांसी देने से पहले मुजरिम से उसकी आखिरी इच्छा पूछी जाती है और वह इच्छाएं वहीं पूरी की जाती हैं।

फांसी के समय कौन-कौन रहता है मौजूद?

फांसी वाले दिन जेल सुप्रीटेंडेंट की निगरानी में गार्ड कैदी को फांसी कक्ष में लाते हैं। इस समय जेल सुप्रीटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर और मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद रहते हैं। फांसी से पहले कैदी की पहचान की जाती है और उसे डेथ वारंट पढ़कर सुनाया जाता है। इसके बाद डेथ वारंट पर कैदी के साइन कराए जाते हैं।

मुजरिम के कान में क्या बोलता है जल्लाद?

जल्लाद जब मुजरिम को फांसी देने चलता है तो उससे ठीक पहले उसके कान में कहता है कि हिंदुओं को राम-राम और मुसलमानों को सलाम। ‘मैं अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं’। मैं आपके सत्य की राह पर चलने की कामना करता हूं। यह कहने के बाद जल्लाद लीवर खींच देता है। इसके बाद डॉक्टर कैदी की नब्ज टटोलते हैं कि उसकी मौत हुई है कि नहीं। मौत की पुष्टि होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाता है।

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