आखिर क्यों ब्रह्म मुहूर्त में काम करना शुभ होता है

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नई दिल्ली।  हिंदू संस्कृति और परंपरा  का बहुत अधिक महत्व है। इसी कारण  आप कोई भी पूजा-पाठ का करते हो या फिर पढाई ही क्यों न हो। घर पर सभी लोग एक ही बात कहते होगे, कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ये काम करों। शुभ फल मिलेगा।

तब हमारे दिमाग में एक ही बात आती है कि आखिर सभी काम ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों किए जाते है। और किसी समय क्यों नही। ब्रह्म मुहूर्त में जितना फल मिलता और किसी समय क्यों नही। आज हम आपको बताएगे कि ब्रह्म मुहूर्त इतना महत्वपूर्ण क्यों है।

मुहूर्त बुध्येय धर्माथर चानु चिंतयेत। कायक्लेशांश्च तंमूलांवेदत वार्थमेव च।

 ब्रह्म का मतलब है कि ईश्वर यानी कि परमात्मा। यानी कि अनुसूल समय। एक दिन में 30 मुहूर्त होते है। और इन 30 मुहूर्त में आठ प्रहर होते है। इन आठ प्रहर में चार दिन के होते है उनके नाम है- पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपरान्ह और सायंकाल इसी तरह रात में चार प्रहर होते है जिनके नाम है- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा और उषा।

इसके साथ ही सूर्योदय के पहले के दो मुहूर्त होते है। उनमें से पहला होता है ब्रह्म मुहूर्त। यह ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:24 से 5:12 मिनट के बीच का होता है। इसलिए इस मुहूर्त में उठकर ये काम करना चाहिेए। सबसे पहले उठकर अपने हाथ को देखते हुए इस श्लोक को बोलना चाहिए।

कराग्रे वसति लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। कर मूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।।

इससे माता सरस्वती सहित सभी देवी-देवता आपरके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखते है। इसके बाद ही दूसरा काम करना चाहिए।

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