ज्ञान और प्रेरणा देने वाली बात पत्रकारिता के महत्व को बढ़ाती है: राम नाईक

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लखनऊः राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि अपनी बात को लोगों तक पहुंचाने और अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करना पत्रकारिता का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने यह बात साईंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में हिन्दी-उर्दू समाचार पत्र अवधनामा के 15वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक सम्मान समारोह में कही।

नाईक ने कहा कि 1857 तथा 1947 की लड़ाई में कुछ लोग संघर्ष किया और कुछ लोग पत्रकारिता के जरिये जन जागरण किया था। लोकमान्य तिलक ने‘केसरी’और‘द मराठा’के माध्यम से अभियान चलाया और इसी तरह गांधी जी के साथ-साथ अन्य हिन्दी और उर्दू के पत्रकारों ने इसी पर काम किया। अपनी बात को लोगों तक ले जाने तथा अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करना पत्रकारिता का लक्ष्य होना चाहिए। ज्ञानवर्धन और प्रेरणा देने वाली बात पत्रकारिता के महत्व को और बढ़ाती है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का बड़ा योगदान देशवासियों को जोडऩे में रहा है। नाईक ने अवधनामा के 15 साल पुरे होने पर उन्होंने बधाई दी और कहा कि 15 साल के सफर का अपना महत्व होता है। अवधनामा धीरे-धीरे अपनी युवावस्था की ओर बढ़ रहा है।‘मेरा और अवधनामा का एक रिश्ता है।

मेरी पुस्तक चरैवेति! चरैवेति!! पर अवधनामा ग्रुप की ओर से उर्दू रायटर्स फोरम ने एक संगोष्ठी रखी थी। उर्दू और अवधनामा के कारण मेरी पुस्तक सात समंदर पार जर्मनी तक पहुंची है। अवधनामा हिन्दी और उर्दू में समाचार पत्र का प्रकाशन करके दोनों भाषाओं को और करीब लाने का काम कर रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि सभी भाषाओं को प्रगति करने का अवसर मिलना चाहिए। वह बात और है कि हिन्दी राष्ट्रभाषा है और सभी भाषाओं की बड़ी बहन है। हिन्दी के बाद सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा उर्दू है जिस पर कोई विवाद नहीं है।

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राज्यपाल ने कहा कि जैसे त्यौहार एक-दूसरे से जोड़ते हैं उसी तरह सबको मिलकर समाज को एक सूत्र में बांधना होगा।

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