कुलदीप सिंह सेंगर बोले- मेरे जरिये सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है

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लखनऊ। उन्नाव रेप केस तूल पकड़ा चुका है। इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार कटघरे में हैं। इस मामले में अपनी सफाई देते हुए आरोपी बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने खुद को निर्दोष बताया है।

कुलदीप सिंह सेंगर

एक न्यूज चैनल न्यूज़ 18 उत्तर प्रदेश को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस मामले को जानबूझ कर बढ़ाया जा रहा है ताकि बीजेपी सरकार को बदनाम किया जाए। सेंगर ने कहा कि उनके कंधे पर बंदूक रखकर बीजेपी सरकार को बदनाम करने की साजिश हो रही है। साथ ही उन्होंने सीबीआई जांच की सिफारिश का सम्मान करते हुए कहा कि जांच के बाद सारा सच सामने आजायेगा।

लेकिन नेता जी इस सवाल का जवाब नहीं डे पाए कि ये साजिश कौन कर रहा है। कुलदीप सिंह सेंगर ने कहा कि मैं दबंग हूं, लेकिन सार्वजानिक जीवन में कभी कोई गलत काम नहीं किया। पीड़िता का चाचा मास्टरमाइंड अपराधी है। उसने मेरे खिलाफ पर्चे छपवाकर बांटे। मेरे खिलाफ साजिश में जो लोग शामिल हैं उनका नाम सीबीआई जांच में सामने आ जाएगा।

अपने आपको निर्दोष बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने कभी पार्टी का नाम इस्तेमाल नहीं किया। मेरे ऊपर लगे सभी आरोप गलत हैं। मैं सीबीआई और न्यायिक जांच का सम्मान करता हूं। पीड़िता का पिता अपराधी था। अगर मेरे भाई अतुल सिंह की गलती है तो बात जरुर सामने आएगी। मैं हमेशा अपनी पार्टी के साथ ईमानदारी से रहा, कभी पद का दुरूपयोग नहीं किया।की बदनामी करने वालों के नाम सामने आएंगे। मैं जिस दल में रहता हूं उसके पांच विधायक उन्नाव से जीतते हैं।”

विधायक ने आगे कहा, “बीजेपी का कार्यकर्ता बनना मेरा सौभाग्य है। बीजेपी जहां से कभी नहीं जीती वहां से मैंने जिताया।” भाई अतुल सिंह द्वारा पीड़िता के पिता की पिटाई और उसके बाद मौत के सवाल पर सेंगर ने कहा, “ मैं अपने भाई के काम में साझेदार नहीं हूं। मैं सीबीआई जांच का स्वागत करता हूं। सीबीआई जांच में साजिशकर्ता सामने आएंगे।”

विधायक पर FIR दर्ज 

उन्नाव रेप कांड में एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद भी आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विधायक के खिलाफ  आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (अपहरण कर शादी के लिए दवाब डालना), 376 (बलात्‍कार), 506(धमकाना) और पॉस्‍को एक्‍ट के तहत मामला दर्ज किया है।  वहीँ योगी सरकार ने इस मामले कि जांच सीबीआई से भी कराने का फैसला किया है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार रात विधायक को सरेंडर करने का आदेश दिया था ।बुधवार रात को बड़ा ही नाटकीय घट्नाक्रम चला। आरोपी विधयक दिलीप सिंह सेंगर रात करीब 40 गाड़ियों में अपने समर्थकों को भरकर  SSP ऑफिस पहुंचे थे। उनका कहना था कि वो यहां सरेंडर करने आये हैं। लेकिन शक्ति प्रदर्शन के बाद वहां से चले गए।

इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए ज़िला अस्पताल के CMS और EMO यानी इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को भी सस्पेंड कर दिया गया है। पीड़ित के पिता का सही से इलाज नहीं करने के आरोप में तीन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। सफीपुर के सीओ को भी सस्पेंड करने का फ़ैसला किया गया है।

 क्या है मामला 

बता दें कि उन्नाव की रहने वाली एक युवती ने कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप और अपने पिता को मरवाने का आरोप लगाया है। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गुंडागर्दी और गैंगरेप का आरोप लगाते हुए रविवार को पीड़िता का पूरा परिवार लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गया। इस दौरान पीड़िता ने आत्मदाह करने की कोशिश भी की।

इस बीच पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पीड़िता के पिता की सोमवार को मौत हो गई। पीड़िता का आरोप है कि पिछले साल 4 जून को कुलदीप सिंह सेंगर और उसके कुछ गुर्गों ने उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसने पुलिस से इसका शिकायत की लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी में से विधायक कुलदीप सिंह का नाम तक हटा दिया गया।

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