लल्लू का योगी पर वार, कहा पराली के बहाने किसानों का उत्पीड़न

लल्लू ने कहा पराली के बहाने किसानों का उत्पीड़न कर रही है योगी सरकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ‘योगी सरकार पराली निस्तारण के बहाने किसानों को जेल भेजकर उनका उत्पीड़न कर रही है’। लल्लू ने यह भी कहा कि किसानों को धान बेचने के लिये क्रय केंद्रों पर चार-चार दिन तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

किसानों के विरुद्ध मुकदमा

लल्लू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पराली समस्या के समाधान के लिये सरकार को निर्देश दिया था कि वह पराली की खरीद कर उसका निस्तारण कराए और पराली निस्तारण के लिये किसानों को समुचित आर्थिक मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करे, लेकिन सरकार अपने दायित्वों से मुँह चुराकर किसानों के विरुद्ध मुकदमे लिखकर उन्हें जेल भेजकर प्रताड़ित कर रही है।

16 किसानों को एक सप्ताह में जेल

अजय कुमार लल्लू ने कहा कि अकेले सहारनपुर जिले में अब तक 16 किसानों को एक सप्ताह में पुलिस ने जेल भेज दिया है और सैंकड़ों किसान अपनी गिरफ्तारी के भय से अपना घर परिवार छोड़कर भागने के लिए विवश हैं। प्रदेश सरकार के इस पुलिसिया उत्पीड़न से किसानों में भय एवं आक्रोश व्याप्त है।

क्रय केंद्रों पर प्रतीक्षा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बोला कि एक तरफ जहां किसानों को धान बेचने के लिये क्रय केंद्रों पर चार-चार दिन तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1886 रूपये के स्थान पर तमाम कमियां बताकर आठ सौ से लेकर नौ सौ रुपये प्रति कुन्तल में किसानों को अपनी धान की उपज बेंचने के लिए विवश कर रही है और उनका शोषण करने पर उतारू है।

सूखे की चपेट में किसाना

लल्लू ने कहा कि बुंदेलखंड के किसान सूखे की चपेट में हैं। नहरों में पानी न आने के कारण झांसी के किसान 30 अक्टूबर से लगातार धरने पर बैठे हैं क्योंकि समय से पानी न आने की वजह से ‘रवी फसल’ की बुआई के लिए खेतों की तैयारी में अत्यधिक देरी हो रही है। पिछली फसल की बर्बादी से कराह रहा किसान अपनी नई फसल की समय से बुआई न कर पाने के भय और आशंका से दुःखी है। इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी बता रही है कि उसके एजेंडे में किसान नहीं हैं।

14 दिन में गन्ना भुगतान

लल्लू ने बोला कि 14 दिन में गन्ना मूल्य के भुगतान के वादे के साथ सत्ता में आई भाजपा के शासन में 14 हजार करोड़ रुपया गन्ना किसानों का अभी भी बकाया है जबकि नया पेराई सत्र चालू होने वाला है। न्यायालय का यह निर्देश था कि 14 दिन में भुगतान न होने पर ब्याज सहित गन्ना मूल्य के बकाये का भुगतान मिलों को करना होगा। ब्याज की तो छोड़िए, अन्नदाता किसान वर्षों से अपने वास्तविक मूल्य के लिए दर-दर की ठोंकरें खा रहा है

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