जेल से ज्यादा अस्पताल में समय बिताया है लालू प्रसाद यादव ने, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

झारखंड: जेल में जाते ही अक्सर हाई प्रोफाइल लोगों की तबीयत खराब हो जाती है। अगर रांची की बिरसा मुंडा जेल के पिछले दस साल के इतिहास को देखें तो ये बात साबित भी होती है। जहां दर्जनों वीआईपी लोगों को स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें आईं और उन्हें जेल से अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा। ताजा उदाहरण है राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (71) का है। जिन्होंने जेल के 19 महीनों में से 17 महीने अस्पताल में काटे हैं और अब भी उनकी तबीयत ठीक नहीं हुई है। वह अभी भी रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में भर्ती हैं। उनकी सुरक्षा के लिए यहां 42 पुलिसकर्मी तैनात हैं। वह यहां के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं।

हर शुक्रवार को एसएसपी और जेल प्रशासन को भेजते है डाक्टर रिपोर्ट

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जेल के इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) वीरेंद्र भूषण ने बताया, “रिम्स के निदेशक लालू प्रसाद की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट हर महीने भेजते हैं। लेकिन किसी भी रिपोर्ट में उन्हें फिट और स्थिर नहीं बताया जाता है। एक बार हमें सकारात्मक रिपोर्ट मिल जाए, हम उन्हें जेल में शिफ्ट कर देंगे।”
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बता दें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव 23 दिसंबर, 2017 से  एक के बाद एक तीन अलग-अलग चारा घोटाला मामलों में सजा मिलने के बाद से जेल में हैं। इनमें से एक मामले में उन्हें इसी महीने जमानत भी मिली है। जेल जाने के महज दो महीने बाद ही उन्हें स्वास्थ्य से संबंधित दिक्कतें आने लगी थीं।

तबियत बिगड़ने के कारण इन्हें दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में शिफ्ट किया गया। मई, 2018 में एम्स में फिट घोषित होने के बाद वह दोबारा रिम्स में भर्ती हुए। हालांकि बाद में उन्हें तुरंत अपने बड़े बेटे की शादी के लिए पैरोल मिल गई थी। फिर उन्हें मुंबई स्थित अस्पताल में अग्रिम उपचार के लिए उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम जमानत दी गई। फिर वह 2018 के मई के आखिर में दोबार रिम्स लौट आए।

हालांकि लालू कई सारी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ी परेशानी उन्हें हुई टाइप-2 डायबटीज और ब्लड प्रेशर हैं। उनका इलाज करने वाले वरिष्ठ डॉक्टर डीके झा का कहना है, “लालू प्रसाद 15 बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता उनकी अनियंत्रित डायबिटीज है, जो पूरी तरह इंसुलिन पर निर्भर है। उन्हें किडनी की भी परेशानी है। उनके कई अंग 50 फीसदी ही कार्य करते पाए गए हैं। इन सभी परेशानियों में अनियमित दिल की धड़कन भी एक समस्या है। उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो गई है, क्योंकि पिछले दिनों उन्हें छह बार त्वचा और मूत्र संक्रमण हुआ था।”
डॉक्टर झा ने आगे कहा, “हम हर शुक्रवार को उनकी रिपोर्ट एसएसपी और जेल प्रशासन को भेजते हैं।”

इससे पहले 2010-12 में, राज्य के पूर्व जल संसाधन मंत्री कमलेश सिंह ने भी सीबीआई द्वारा दर्ज संपत्ति से जुड़े एक मामले का सामना किया था। हिरासत के दौरान उनका लंबे समय तक रिम्स में इलाज चला। सिंह के अलावा, एनोस एक्का, भानु प्रताप शाही, मधु कोड़ा, ढुल्लू महतो और चंद्रशेखर दुबे सहित अन्य पूर्व मंत्रियों और विधायकों का भी रिम्स में हिरासत के दौरान इलाज चला था।

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