उत्तराखंड में Landslide, खतरे के निशान पर अलकनंदा नदी, रेड अलर्ट जारी

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में ब्यासी के पास नेशनल हाईवे-58(ऋषिकेश-श्रीनगर हाईवे) भूस्खलन की वजह से बंद हो गया है

देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) में लगातार हो रही बारिश की वजह से अलकनंदा नदी (Alaknanda River) खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दूसरी तरफ टिहरी गढ़वाल में ब्यासी के पास नेशनल हाईवे-58(ऋषिकेश-श्रीनगर हाईवे) भूस्खलन की वजह से बंद हो गया है।

श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। जिसे देखते हुए प्रदेश में रेड अलर्ट जारी किया गया है। ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान तक पहुंच गया है। जिसको ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने वहां पर अलर्ट जारी कर दिया है।

उत्तराखंड में गंगा के कई रूप

उत्तराखंड के चार धामों में गंगा के कई रूप और नाम हैं। गंगोत्री में गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है, केदारनाथ में मंदाकिनी और बद्रीनाथ में अलकनन्दा। यह उत्तराखंड में संतोपंथ और भगीरथ खरक नामक हिमनदों से निकलती है। यह स्थान गंगोत्री कहलाता है। अलकनंदा नदी घाटी में लगभग 195 किमी तक बहती है। देव प्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी का संगम होता है और इसके बाद अलकनंदा नाम समाप्त होकर केवल गंगा नाम रह जाता है।

अलकनंदा चमोली रुद्रप्रयाग टिहरी और पौड़ी जिलों से होकर गुज़रती है। गंगा के पानी में इसका योगदान भागीरथी से अधिक है। हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ अलखनंदा के तट पर ही बसा हुआ है। राफ्टिंग इत्यादि साहसिक नौका खेलों के लिए यह नदी बहुत लोकप्रिय है। तिब्बत की सीमा के पास केशवप्रयाग स्थान पर यह आधुनिक सरस्वती नदी से मिलती है। केशवप्रयाग बद्रीनाथ से कुछ ऊंचाई पर स्थित है।

अलकनन्दा नदी उत्तराखंड के इलाके में कहीं बहुत गहरी, तो कहीं उथली है। अलकनंदा की 5 सहायक नदियां हैं जो गढ़वाल क्षेत्र में 5अलग अलग स्थानों पर अलकनंदा से मिलकर पंच प्रयाग बनाती हैं।

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