अटल युग का अंतिम सफर : भाजपा मुख्यालय ले जाया जा रहा पार्थिव शरीर, 1 बजे शुरू होगी अंतिम यात्रा

हिन्दी कवि, पत्रकार, एक प्रखर वक्ता, भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज निधन हो गया। 93 वर्षीय अटल ने गुरुवार को एम्स में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे और उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। राजनीति के ‘अटल’ कहे जाने वाले वाजपेयी के देहांत की खबर के बाद से ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गयी है।

वाजपेयी जी का अंतिम सफर: भाजपा मुख्यालय ले जाया जा रहा पार्थिव शरीर, 1 बजे शुरू होगी अंतिम यात्रा

वाजपेयी जी के पार्थिव शरीर को जल, थल और वायु सेना के साथ सेना की एक बड़ी ही विशेष गाड़ी से भाजपा मुख्यालय ले जाया जा रहा है। इस विशेष गाड़ी को सफेद फूलों से सराबोर कर दिया गया है।

रातभर वाजपेयी के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रखा गया था। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शुक्रवार सुबह श्रद्धांजलि देने पहुंचे। साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई नेता कल शाम से अब तक श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक भाजपा मुख्यालय से दोपहर 1 बजे अंतिम यात्रा शुरू होगी, जो राजघाट स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक जाएगी। वाजपेयी की अंतिम यात्रा भाजपा मुख्यालय से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (डीडीयू) से होते हुए आईटीओ और वहां से राजघाट के पीछे स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर पहुंचेगी। भाजपा मुख्यालय से यहां तक की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है।

वाजपेयी जी का शाम 4 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। वे नौ साल से बीमार थे और 67 दिन से एम्स में भर्ती थे।

यमुना किनारे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर डेढ़ एकड़ जमीन पर अटल बिहारी वाजपेयी का समाधि स्थल बनाया जाएगा। यूपीए सरकार ने नदी के किनारे समाधि स्थल बनाने पर रोक लगा दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए वहां समाधि स्थल बनाने का फैसला लिया है। इस संबंध में मोदी सरकार जल्द अध्यादेश ला सकती है।

पाकिस्तान तहरीक-इंसाफ के नेता और प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान खान ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के एक बड़े व्यक्तित्व थे। भारत-पाक संबंधों में सुधार के लिए उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा।

वाजपेयी के निधन पर सभी लोग अपार दुख व्यक्त कर रहे हैं। चीन के राजदूत लुयो झाओहुई ने ट्वीट किया- अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से गहरा दुख पहुंचा है।

भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शासनकाल में अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों पर जोर दिया।

ब्रिटेन और जापान के राजदूत ने कहा कि वे वैश्विक नेताओं में से एक थे।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों में भी अटल बिहारी वाजपेयी काफी लोकप्रिय थे। नरेंद्र मोदी ने अटलजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जाना सिर से पिता का साया उठने जैसा है। इससे पहले उन्होंने ट्वीट में कहा- ‘‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटलजी हमारे बीच नहीं रहे। यह मेरे लिए निजी क्षति है। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है।’’

40 साल का राजनीतिक जीवन खुली किताब

अटल बिहारी वाजपेयी जी अपने मंत्रिमंडल के प्रति विश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस के बाद प्रधानमंत्री के रूप में चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, पार्टी तोड़कर सत्ता के लिए नया गठबंधन करके अगर सत्ता हाथ में आती है तो मैं ऐसी सत्ता को चिमटे से भी छूना नहीं पसंद करूंगा । भगवान राम ने कहा था कि मैं मृत्यु से नहीं डरता। अगर डरता हूं तो बदनामी से डरता हूं। 40 साल का मेरा राजनीतिक जीवन खुली किताब है। कमर के नीचे वार नहीं होना चाहिए। नीयत पर शक नहीं होना चाहिए। मैंने यह खेल नहीं किया है। मैं आगे भी नहीं करूंगा।

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