यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर विधि आयोग का केंद्र सरकार को झटका, कहा- फिलहाल देश …

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यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर विधि आयोग ने मांग और अपनी इच्छा ज़ाहिर करते हुए कहा है कि फिलहाल देश को इसकी जरूरत नहीं है। यही नहीं बल्कि समान नागरिक संहिता को लेकर आयोग ने कहा कि देश में विविधता का अर्थ असमानता से नहीं बल्कि विविधता से लगाया जाना चाहिए। आयोग ने लॉ कमिशन ने कंसल्टेशन पेपर जारी करते हुए कहा है कि लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में अधिकार देने के लिए कानून बनाने की दरकार है।

आयोग ने विस्तृत परिचर्चा के बाद जारी कंसल्टेशन पेपर में विभिन्न धर्मों, मतों और आस्था के अनुयायियों के पर्सनल लॉ को संहिताबद्ध करने और उन पर अमल की जरूरत बताई है। आयोग ने समान नागरिक संहिता पर भारतीय विधि आयोग का कंसल्टेशन पेपर और सभी धर्मों के पर्सनल लॉ में सुधार की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक आयोग का कहना है कि धार्मिक रीति-रिवाजों और मौलिक अधिकारों के बीच सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता है। ट्रिपल तलाक सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध बताया गया है। इसका विवाह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। एक तरफ से किए गए तलाक को घरेलू हिंसा अधिनियम, महिलाओं पर क्रूरता, और आईपीसी की धारा 498 के तहत दंडित किया जाना चाहिए।

मुस्लिम विवाह और निकाहनामा को लेकर कंसल्टेशन पेपर में जिक्र किया गया है कि मुसलमानों के बीच प्रचलित संविदात्मक विवाह महिलाओं के लिए फायदेमंद है, लेकिन तभी जब अनुबंध वास्तव में बातचीत और पक्षों द्वारा सहमत है।

रिपोर्ट अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मॉडल निकाहनामा और जीनत शौकत अली द्वारा लिखित भारत में विवाह और तलाक पुस्तक में दिखाए जाने पर विचार करने को लेकर है। तीसरा विवाह करने के लिए इस्लाम में परिवर्तित हो जाते हैं। कई मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर इस बारे में सख्त ।

सूत्रों के मुताबिक विधि आयोग विशेष विवाह अधिनियम 1954 में परिवर्तन चाहता है। विवाह वैध होने से पहले विवाह करने वाले जोड़े के माता-पिता को 30 दिनों के लिए अनिवार्य नोटिस की मोहलत दी गई है। आयोग की यह भी सिफारिश है कि 30 दिन के खंड को हटा दिया जाना चाहिए या जोड़े को सुरक्षा दी जानी चाहिए।

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