‘मंत्री जी’ की तरह हाथी पर चढ़ कुर्सी हथियाएंगे मां-बेटे !

sp_b_30-05-2012गोरखपुर। आधा दर्जन से अधिक बार चुनाव हारने के बाद बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचने और मंत्री बनने वाले स्व.जमुना प्रसाद निषाद का कुनबा उनकी राह पर है। फिलहाल तो उनकी पत्नी राजमती निषाद गोरखपुर की इकलौती सपा विधायक हैं और उनके बेटे अमरेंद्र सपा के युवा नेता है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि यह परिवार हाथी पर चढ़ने की तैयारी में है।

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हांलाकि अभी तक सपा डैमेज कंट्रोल स्ट्रैटजी पर काम कर रही है और घोर अनुशासनहीनता के बावजूद विधायक और उनके बेटे पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व मंत्री स्व.जमुना प्रसाद निषाद, निषाद बिरादरी के सर्वमान्य नेता रहे। वे जहां खड़े हुये, निषाद उनके साथ रहा। स्व.जमुना निषाद ने भी घाट-घाट का पानी पिया। कभी सपा में रहे तो कभी बसपा में चले गये। राममंदिर आंदोलन के बाद उसका प्रभाव देखकर उन्होंने भाजपा का भी दामन थामा, लेकिन उनके सारे प्रयास नाकाफी साबित हुये।

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किस्मत तब रंग लाई जब दो हजार सात में वे बसपा से विधायक बने और सरकार में मत्स्य राज्यमंत्री भी। महराजगंज के कोतवाली में हुये हत्याकांड में वह जेल गये और बाहर निकलने के छह महीने के भीतर सड़क दुर्घटना में मारे गये। सहानुभूति की लहर में उनकी पत्नी राजमती ने सपा में शामिल होकर दो बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया, लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं।

गारंटेड कुर्सी का प्रयास

सपा विधायक राजमती निषाद वर्ष दो हजार सतरह के चुनाव में भी हर हाल में कुर्सी हासिल करना चाहती हैं। वे किसी भी कीमत पर एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर का शिकार नहीं होना चाहती। उन्हें एहसास है कि फिक्स निषाद वोटबैंक के साथ बसपा का वोटबैंक मिलेगा तो इस बार की विधायिकी भी पक्की हो जाएगी।

खुलकर विरोध भी नहीं

सपा विधायक के बेटे और युवा नेता अमरेंद्र जिला पंचायत के चुनाव में खुलकर पार्टी लाइन के खिलाफ नजर आए। हांलाकि जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने निजी संबंधों का हवाला दिया। इसके बावजूद पार्टी आलाकमान ने इसे अनुशासनहीनता ही माना है। बहरहाल पार्टी की नाराजगी पर भी यह परिवार चुप है और अभी तक रूख बहुत स्पष्ट नहीं है।

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