जानें कम्युनिटी ट्रांसमिशन और हर्ड इम्यूनिटी के बारे में, वायरस फैलने के इतने चरण

कोरोना वायरस का संक्रमण भारत समेत दुनिया के दूसरे देशों में बढ़ता जा रहा है. इतनी बड़ी तदाद में संक्रमण के शुरू होने के बाद अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन और हर्ड इम्यूनिटी के सवाल सामने आने लगे हैं. आईसीएमआर के अनुसार कोरोना वायरस फैलने के चार चरण हैं.
पहले चरण में वे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए जो दूसरे देश से संक्रमित होकर भारत में आए. यह स्टेज भारत पार कर चुका है क्योंकि ऐसे लोगों से भारत में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैल चुका है. दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है, लेकिन ये वे लोग होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे संक्रमित शख़्स के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा करके लौटे थे. तीसरा चरण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता है. इसमें ट्रांसमिशन के स्रोत का पता चलना मुश्किल होता है. किसी महामारी का चौथा चरण भी होता है, जब संक्रमण स्थानीय स्तर पर महामारी का रूप ले लेता है.

एक अनुमान के अनुसार किसी समुदाय में कोविड-19 के ख़िलाफ़ ‘हर्ड इम्यूनिटी’ तभी विकसित हो सकती है, जब तक़रीबन 60 फ़ीसद आबादी को कोरोना वायरस संक्रमित कर चुका हो और वे उससे लड़कर इम्युन हो गए हों. हालांकि ये इस पर भी निर्भर करता है कि बीमारी कितनी संक्रामक है. आम तौर पर 70 से 90 फ़ीसद आबादी का इम्यून होना ज़रूरी होता है हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुँचने के लिए.

ख़सरा, गलगंड, पोलियो और चिकन पॉक्स कुछ ऐसी संक्रामक बीमारियां हैं जो कभी बहुत आम हुआ करती थीं लेकिन अब अमरीका जैसी जगह पर दुर्लभ है क्योंकि वैक्सीन की मदद से हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुँचने में वहाँ मदद मिली और पहुँच पाए. अगर कोई ऐसी संक्रामक बीमारी है जिसका वैक्सीन तैयार नहीं हुआ है लेकिन व्यस्कों में उस संक्रमण को लेकर पहले से इम्यूनिटी मौजूद है तब भी ये बच्चों या फिर कमज़ोर इम्युन सिस्टम वाले लोगों को संक्रमित कर सकता है. ऊपर जिन बीमारियों का ज़िक्र किया गया है, उनमें से कई बीमारियों के मामले में वैक्सीन बनने से पहले यह देखा जा चुका है.

कुछ दूसरे वायरस जैसे फ्लू के वायरस में समय के साथ बदलाव होता रहता है इसलिए पुराने एंटी-बॉडी जो इंसान के शरीर में तैयार हुए होते हैं वो काम नहीं आते हैं और फिर से इंसान संक्रमित हो जाता है. फ्लू के मामले में यह बदलाव एक साल से भी कम समय में हो जाता है. अगर कोविड-19 के लिए ज़िम्मेदार सार्स-कोवी-2 दूसरे कोरोना वायरस की तरह ही है तो फिर हम इससे इम्युन होने वाले लोगों के कुछ महीने या साल तक संक्रमित नहीं होने की तो उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन पूरी ज़िंदगी भर के लिए नहीं.

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