आइये जानें, दक्षिणावर्ती शंख से कैसे प्राप्त कर सकते हैं माता महालक्ष्मी की असीम कृपा

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दक्षिणावर्ती शंख का महत्व:- यूं तो शंख से प्रत्येक व्यक्ति परिचित है प्राचीन काल से धार्मिक, आध्यात्मिक गतिविधियों व पूजा पाठ में शंख का अपना विशेष महत्व होता है। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि शंख के( नाद )से वातावरण प्रदूषण से मुक्त होजाता है एवं नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। प्रतिदिन शंख बजाने से फेफड़ों का व्यायाम होता है जिसके कारण हृदय रोग नहीं होता है। शंख यू तो कई प्रकार के होते है।

दक्षिणावर्ती शंख

महाभारत का युध्द शंख ध्वनि से प्रारम्भ होता था और शंख ध्वनि से ही  विराम होता था। सभी के अपने अपने विशेष प्रकार के  मंत्रों से सिद्ध किये शंख हुवा करते थे जैसा गीता के प्रथम अध्याय के 15 से 18श्लोकों से स्पष्ट होता है

श्लोक – पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जय:।

पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः।।15।।

अर्थ:- भगवान श्री कृष्ण  ने अपना पंचजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख तथा अतिभोजी अतिमानवीय कार्य करने वाले भीम ने पौण्ड्र नामक शंख बजाया।

इस प्रकार विभिन्न शंखों की अपनी अपनी विविध विधा होती है ठीक उसी प्रकार माता महालक्ष्मी व नारायण का सर्व प्रिय शंख है जिसे हम लोग दक्षिणावर्ती शंख के नाम से जानते हैं। यूं तो दक्षिणावर्ती शंख  कम मात्रा में पाया जाता है। दक्षिणावर्ती शंख उस शंख को कहते हैं जिसका पेट दाहिनी ओर खुलता है इसे लक्ष्मी शंख भी कहते हैं। पौराणिक ग्रन्थों में दक्षिणावर्ती शंख  की उत्तपत्ति के विषय में इस प्रकार लिखा है कि समुद्र मंथन  में जब यह निकला तो भगवान विष्णु ने इसे अपने दाहिने हाथ में धारण करलिया फलतः यह भगवान विष्णु तथा माता महालक्ष्मी का यह प्रिय पात्र के रूप में पूजनीय हुवा।पूजा के लिए दक्षिणावर्ती शंख छोटा या बड़ा कोई भी हो सबका प्रभाव समान होता है।दक्षिणावर्ती शंख में भराहुवा जल भी पवित्र नदियों के  जल के समान पुण्य देने वाला होता है।

दक्षिणावर्ती शंख धनदायक तथा जिस घर मे इनकी पूजा होती है वहाँ सुख संवृद्धि का सदैव  निवास रहता है माता महालक्ष्मी व भगवान विष्णु को दक्षिणावर्ती शंख से ही स्नान करना चाहिए । दक्षिणावर्ती शंख को  यदि हो सके तो चाँदी या सोने के सिंहासन पर विराजमान करें शुद्धजल, पंचामृत,पुनः शुद्धजल से स्नान कराकर  चन्दन ,धूप,दिप, केशर, पुष्प  तथा नैवेद्य के साथ  नित्य पूजन करने  से माता महालक्ष्मी उस व्यक्ति पर अपनी असीम कृपा सदैव बनाये रखती है इस शंख का मुख पूजाकरने वाले कि तरफ तथा पूछ का भाग भगवान की तरफ करके रखना चाहिए।

दक्षिणावर्ती शंख का बीज मंत्र:-ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं श्री धरकरास्थ्य श्री दक्षिणावर्त शंखाय श्री पयोनिधि जाताय श्री कराय पूज्याय नमः। इस मंत्र का 108 बार रोजाना जप करने से निश्चिततः व्यक्ति लक्ष्मीवान होता है।

आचार्य स्वामी विवेकानन्द

श्री अयोध्या धाम  ज्योतिर्विद

संपर्क सूत्र:-9044741252

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