खंडाला गर्ल Rani Mukherjee के Birthday पर जानें उनके जीवन की रोचक बातें

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी का जन्मदिन है, रानी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ से की थी

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी (Rani Mukherjee) हिन्दी फिल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। 2005 में वे बॉलीवुड के मुख्य 10 शक्तिशाली लोगों में सिर्फ एक महिला थी। रानी ही एक ऐसी अभिनेत्री है जिसे फिल्मफेयर ने 3 साल लगातार (2004-2006) बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्री घोषित किया है। रानी समाज सेवा के कामों में बहुत सक्रिय रहती हैं और उन्होंने बहुत सारी संस्थाओं के लिये चंदा इकठ्ठा किया है।

World tour में हिस्सा

रानी मुखर्जी 2 विश्व टूर (World tour) में हिस्सा लिया है जहां बॉलीवुड के और सितारों के साथ उन्होंने स्टेज शो में दर्शकों के सामने प्रदर्शन किया। अपने पहले टूर में वे आमिर खान, ऐश्वर्या राय बच्चन, अक्षय खन्ना और ट्विंकल खन्ना के साथ थीं और दूसरे में शाहरुख खान, सैफ अली खान, प्रीती जिंटा, अर्जुन रामपाल और प्रियंका चोपड़ा के साथ दिखीं|

2005 में उन्हें बॉलीवुड की तरफ से पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ खाने पर न्योता दिया गया। 2006 में उन्हें बाकी बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ ऑस्ट्रेलिया के कोम्मनवेल्थ (Commonwealth) खेलों में भारतीय परंपरा का प्रदर्शन किया। रानी मुखर्जी का जन्म 21 मार्च 1976 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ। इनके पिता राम मुखर्जी निर्देशक रह चुके हैं और उनकी मां एक गायक है। उनका भाई राजा भी फिल्म निर्देशक हैं। अभिनेत्री काजोल (Kajol) उनकी रिश्तेदार हैं।

फिल्मी करियर की शुरुआत

रानी मुखर्जी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत ‘राजा की आएगी बारात’ से की पर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही। इससे पहले उन्हें अपने पिता की बंगाली फिल्म ‘बियेर फूल (1992)’ में एक छोटा किरदार करने को मिला था। उनके पारिवारिक मित्र सलीम अख्तर ने ‘आ गले लग जा’ (1994) में उन्हें रोल दिया था जिसे रानी के पिता ने ठुकरा दिया था, जिसके बाद वह किरदार उर्मिला मातोंडकर को मिला।

उनको पहली सफलता फिल्म गुलाम से मिली जिसने उन्हें ‘खंडाला गर्ल’ नाम से चर्चित कर दिया। हालांकि फिल्म कुछ खास सफल नहीं रही पर ‘आती क्या खंडाला’ गाने ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया। उनकी पहली बड़ी सफल फिल्म रही शाहरुख खान के साथ ‘कुछ कुछ होता है’। हालांकि उनका किरदार इस फिल्म में सीमित था पर फिल्म की सफलता से वे निर्देशकों की नजरों में आ गयीं। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में काम मिला पर वे ज्यादा सफल नहीं रहीं।

उनकी अगली फिल्में बादल, चोरी चोरी चुपके चुपके और मुझसे दोस्ती करोगे, कुछ खास कमाल नहीं कर पायी| पर साथ ही उन्हें यशराज बैनर के टैली फिल्म करने का मौका जरुर मिला। उनकी अगली सफल फिल्म रही विवेक ओबेरोई के साथ ‘साथिया’ (2002), जिसके लिये उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

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