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जानें कब है Sheetala Ashtami क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग, पढ़ें इसकी पौराणिक कथा

होली के आठवें दिन उत्तर भारत के अधिकांश घरों में शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami) मनाई जाती है। कई जगह इसे सप्तमी तिथी को भी मनाया जाता है।

नई दिल्ली: होली के आठवें दिन उत्तर भारत के अधिकांश घरों में शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami) मनाई जाती है। कई जगह इसे सप्तमी तिथी को भी मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला माता की पूजा हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जाती है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। शीतला अष्टमी को बसोड़ा भी कहते हैं, क्योकी इस दिन घर में ताजा खाना बनना वर्जित होता है। इस साल शीतला अष्टमी 4 अप्रैल को मनाया जाता है।

Sheetala Ashtami पर क्यों लगाए जाते है बासी भोजन का भोग

शीतला माता को बासी भोजन भोग में लगाए जाते है। इस दिन माता शीतला को दही, रबड़ी, मीठे चावल और पुआ का भोग लगाया जाता है। ये सभी सामान सप्तमी की रात में ही बनाकर रख लिया जाता है। आखिर क्यों इस दिन बासी भोजन भोग लगाने की परंपरा है। शीलता माता के कथा के अनुसार एक दिन माता के मन में विचार आता है कि धरती पर चलकर देखे की उनकी पूजा अर्चना कौन-कौन करता है। माता एक बुढ़िया का रुप धारण कर के राजस्थान के डूंगरी गांव में गई।

 

माता जब गांव में जा रही थी कि तभी ऊपर से किसी ने चावल का उबला हुआ पानी डाल दिया। जिससे माता के पूरे शरीर पर छाले हो गए और पूरे शरीर में जलन होने लगी। माता दर्द में कराहते हुए गांव में सभी से सहायता मांगी परंतु किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की। गांव में कुम्हार परिवार की एक महिला ने जब देखा कि एक बुढ़िया दर्द से कराह रही है तो उसने माता को बुलाकर घर पर बैठाया और बहुत सारा ठंडा जल माता के ऊपर डाला। ठंडे जल के प्रभाव से माता को उन छालों की पीड़ा में राहत महसूस हुई।

बालों से निकली तीसरी आंख

इसके बाद वह महिला माता से कहती है मेरे पास केवल रात की दही और रबड़ी बची हुई है। फिर माता रात की बासी रबड़ी और दही खाती है जो की उनके शरीर को काफी ठंडा करता है। इसके बाद वह महिला कहती है आपके बाल विखरे हुए है लाइए मै इन्हे गूंथ देती हूं। जैसे ही वह महिला माता शीतला की चोटी बनाने लगी तो उसे बालों के नीचे छुपी तीसरी आंख दिखी। यह देखकर वह डर कर भागने लगी।

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तभी माता ने कहा बेटी डरो मत में शीतला माता हूं और मैं धरती पर ये देखने आई थी कि मेरी पूजा कौन करता है। माता शीतला अपने मूल रूप में प्रकट हो गई। इसके बाद वह कुम्हारीन को वर देती है। इसलिए इस दिन शीतला माता को लोग बासी भोजन का भोग लगाते है और पूजा करते हैं।

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