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2022 विधानसभा चुनाव से पहले UP में बहाल हुई विधायक निधि, विकास के लिए मिलेंगे 3 करोड़

लखनऊ: सूबे की योगी सरकार ने प्रदेश के विधायकों की निधि जिससे वे अपनी विधानसभा में विकास के कार्य करते हैं उसे एक बार फिर बहाल कर दिया है। इसके लिए उन्हें निधि में 3-3 करोड़ रुपये देने की घोषणा हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इसकी घोषणा की है। अब जल्दी ही विधायक अपनी विधानसभा क्षेत्र को संवारने और जनता को अपने हिस्से से लाभ पहुंचाने में इस निधि का प्रयोग कर सकेंगे।

लम्बे समय से निधि की बहाली की मांग चल रही थी। सूबे के वित्त मंत्री ने इस मांग को पूरा करते हुए 3-3 करोड़ निधि देने की घोषणा करदी है। सरकार की योजना के मुताबिक विधायक अपनी निधि से क्षेत्र के लोगों की चिकित्सा सेवा के लिए 25 लाख रुपये और किसी आपदा के समय सहयोग राशि के रूप में इसमें से पैसे दे सकते हैं। दरअसल विधायकों की तरफ से क्षेत्र की जनता की समस्याओं को निपटाने के लिए काफी वक्त से निधि दिए जाने की मांग की जा रही थी।

कोरोना महामारी काल में बंद की गई थी विधायकों की निधि

देश जब कोरोना महामारी से जूझ रहा था तो लोगों तक समस्त सुविधाएँ पहुंचने एवं बेहतर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विधायक निधि पर रोक लगा दी गई थी। विधानसभा सत्र के शुरू होते ही क्षेत्र की जनता तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने विधायक निधि बहाल करने की मांग की। गौरतलब है की अगले वर्ष विधायकी के चुनाव भी हैं और लगातार विधायक निधि की मांग भी कर रहे थे इसके मद्देनज़र सरकार ने ये फैसला लिया है। सूबे में विधायकों को मिलने वाली निधि की बहाली से अब क्षेत्र की जनता को भी बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि विधायक निधि के अभाव में विधायक अपने क्षेत्र में लंबित पड़ी समस्यायों को दूर नहीं कर पा रहे थे।

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बता दें कि कोरोना महामारी के कारण विधायकों को मिलने वाली निधि पर रोक लगी थी। पर अगले वर्ष होने वाले चुनावों को देखते हुए विधायकों ने सरकार से निधि की बहाली की मांग की थी। सरकार भी चाहती है की विकास कार्यों में तेज़ी आये। अब निधि की बहाली होने के बाद विधायक अपने क्षेत्रों में लंबित पड़ी समस्यों को खत्म कर सकेंगे। सरकार के सम्मुख विधायकों ने चुनाव को लेकर ये अंदेशा दिया था कि निधि के आभाव के कारण चुनाव पर असर पड़ सकता है। जिसके बाद सरकार ने विकास कार्यों पर आ रही रूकावट को देखते हुए निधि को बहाल कर दिया। ऐसे में विधायक अब अपने संगठन से किसी तरह की बहानेबाज़ी नहीं कर पाएंगे।

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